बिहार की NEET छात्रा की संदिग्ध मौत पर फूटा छात्रों का गुस्सा, न्याय के लिए जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन

बिहार की नीट छात्रा की मौत पर आक्रोश, दिल्‍ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन


नई दिल्ली, 8 फरवरी। बिहार की एक नीट छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर जवाबदेही और न्याय की मांग तेज हो गई है। इसी कड़ी में रविवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक बड़े विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया।

इस घटना ने न केवल छात्र समुदाय को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि छात्र सुरक्षा, प्रशासनिक लापरवाही और संस्थागत जिम्मेदारी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाथों में तख्तियां लिए और जोरदार नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने मामले की त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।

उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की अपील की और कहा कि इस तरह की घटनाएं शिक्षा व्यवस्था में गहरी खामियों को उजागर करती हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लगातार बढ़ते दबाव, मानसिक सहयोग की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।

इस विरोध प्रदर्शन में सिविल सोसाइटी के सदस्यों, विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नीट, आईआईटी और अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से जुड़ी इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं, जिससे समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के नेता महाबल मिश्रा ने सरकार से इस मामले में निर्णायक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत दोषियों की पहचान कर उन्हें कड़ी सजा दिलानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र या बच्ची को इस तरह के अन्याय का सामना न करना पड़े।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में न्याय में देरी जनता के भरोसे को कमजोर करती है और अपराधियों का मनोबल बढ़ाती है।

विरोध प्रदर्शन में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पटना में छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना बेहद दुखद और शर्मनाक है, लेकिन उससे भी ज्यादा गंभीर बात यह है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। पीड़िता के माता-पिता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जबकि पुलिस और प्रशासन मामले को गंभीरता से लेने के बजाय कमजोर करने में लगे हुए हैं।

प्रदर्शनकारी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि एनडीए सरकार इतनी अहंकारी हो चुकी है कि जवाबदेही जैसी कोई चीज बची ही नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले में एक विशेष जांच समिति (एसआईटी) का गठन तो किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है। उन्होंने मांग की कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए जल्द से जल्द फैसला लिया जाए।

शिक्षक ध्रुव कुमार राय ने भी मामले पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला के खिलाफ किया गया अपराध उसकी गरिमा पर सीधा हमला होता है और इस मामले में जो कुछ हुआ है, वह पूरे समाज के लिए शर्म की बात है। उनकी और अन्य शिक्षकों की एकमात्र मांग है कि दोषियों को ऐसी सजा दी जाए, जो भविष्य में एक मजबूत मिसाल बने और इस तरह के जघन्य अपराधों पर लगाम लगे।
 
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