शिमला, 8 फरवरी। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रविवार को स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश को हाल के वर्षों में पिछले सालों की तुलना में कहीं अधिक राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) प्राप्त हुआ है।
हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ संकेत दिया कि राज्यों को अपनी राजस्व प्रणालियों को मजबूत करने के साथ-साथ राजकोषीय अनुशासन अपनाने की जरूरत है। उनका कहना था कि केवल केंद्रीय सहायता पर निर्भर रहने के बजाय राज्यों को अपने वित्तीय ढांचे को सुदृढ़ करना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राजकोषीय घाटा मूल रूप से राजस्व और व्यय के बीच का अंतर होता है और इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि संरचनात्मक वित्तीय सुधारों के जरिए ही कम किया जा सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दीर्घकालिक समाधान के लिए खर्च की प्राथमिकताओं और राजस्व संग्रह दोनों पर गंभीरता से काम करना आवश्यक है।
गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा, खासकर 2026-27 के आगामी बजट पर। मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह भी कहा था कि आरडीजी को समाप्त करना किसी सरकार का नहीं, बल्कि राज्य की जनता के अधिकारों का मुद्दा है और इस संबंध में वे भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने को तैयार हैं। उनका मानना है कि एक बार आरडीजी का प्रावधान खत्म हो गया तो जनता के अधिकारों को वापस पाना मुश्किल हो जाएगा।
इस पर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने स्पष्ट किया कि आरडीजी को हमेशा एक अस्थायी और संक्रमणकालीन सहायता व्यवस्था के रूप में देखा गया है। उन्होंने कहा कि इसे पहली बार पूर्व वित्त आयोगों की सिफारिशों पर उन राज्यों की मदद के लिए लागू किया गया था जो वित्तीय संकट से जूझ रहे थे ताकि वे अल्पकालिक घाटे को संभाल सकें। उन्होंने दो टूक कहा कि इसका उद्देश्य कभी भी स्थायी अधिकार के रूप में नहीं था।
उन्होंने बताया कि एक के बाद एक वित्त आयोगों ने इस व्यवस्था को बेहद सावधानी से आगे बढ़ाया। खासतौर पर 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान, कोविड-19 महामारी के समय राज्यों को उबरने में मदद के लिए आरडीजी सहायता को अभूतपूर्व स्तर पर अग्रिम रूप से उपलब्ध कराया गया। इससे राज्यों को उस कठिन दौर में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली।