"सत्ता और पद तभी सार्थक जब सेवा-करुणा से जुड़ें": विजेंद्र गुप्ता ने समझाया राष्ट्र निर्माण का पाठ

'सत्ता और पद तभी सार्थक हैं जब वे सेवा और करुणा से जुड़े हों': विजेंद्र गुप्ता


नई दिल्ली, 8 फरवरी। इस पंचकल्याणक महामहोत्सव का साक्षी होना केवल एक धार्मिक अनुभव नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक शांति का मार्ग है...यह विचार दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने रविवार को जैन तीर्थ वीरोदय, निर्माण विहार, दिल्ली में प्रथम विश्वकर्मा तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशाल आध्यात्मिक सभा को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

प्रथम तीर्थंकर की आध्यात्मिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) ने ही विश्व को सभ्यता, श्रम और कर्तव्य का पहला पाठ पढ़ाया था। आज इस प्राण प्रतिष्ठा के माध्यम से हम उन शाश्वत मूल्यों को अपने जीवन में पुनर्जीवित कर रहे हैं। जैन समाज ने अपनी सादगी और अहिंसा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है।

पूज्य गुरुदेव के दर्शन का उल्लेख करते हुए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने आध्यात्मिकता और शासन के आपसी संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव का 'जन-संवेदना' का दर्शन हमें सिखाता है कि चाहे राजनीति हो या समाज सेवा, हमारा अंतिम लक्ष्य समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का कल्याण होना चाहिए। यह महोत्सव हमें याद दिलाता है कि सत्ता और पद तभी सार्थक हैं जब वे सेवा और करुणा की जड़ों से जुड़े हों।

उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समिति के पुण्य प्रयासों ने राष्ट्रीय राजधानी के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गौरव को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

जैन धर्म के सार्वभौमिक संदेश पर जोर देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने नागरिकों से 'जिओ और जीने दो' के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक ऐसे समाज का निर्माण करना जहां प्रेम, स्नेह और सद्भाव निरंतर प्रवाहित हो, तीर्थंकरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
 

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