हैदराबाद, 8 फरवरी। तेलंगाना के सिद्धिपेट जिले में एक बाघ द्वारा लगातार मवेशियों को मारे जाने की घटनाओं से दहशत का माहौल बना हुआ है। तेलंगाना वन विभाग ने इस बाघ को पकड़ने के लिए अभियान और तेज कर दिया है।
कोहेडा मंडल के अरेपल्ली गांव में उस वक्त लोगों में घबराहट फैल गई, जब कुछ किसानों ने खेतों के पास इस बाघ को देखा। बाघ ने चंद्रनाइक थांडा के पास पांच बछड़ों को मार डाला। इस घटना में किसान मलोत रमेश को भारी नुकसान हुआ है।
ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग के अधिकारी पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे और बाघ के पंजों के निशान (पगमार्क्स) एकत्र किए। अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने मवेशियों को खेतों में न बांधें, बल्कि घरों में सुरक्षित रखें।
वन विभाग ने किसानों को अकेले खेतों में न जाने की भी चेतावनी दी है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
इससे पहले बाघ ने जिले के घनापुर, अक्केनपल्ली और बसवापुरम गांवों में भी मवेशियों पर हमला किया था। घनापुर गांव में एक कृषि क्षेत्र में बाघ ने एक बछड़े को मार डाला, जबकि एक अन्य को गंभीर रूप से घायल कर दिया। किसान बाल रेड्डी ने बताया कि जब वह पशुशाला पहुंचे तो उन्होंने एक बछड़े को मृत और दूसरे को घायल अवस्था में पाया।
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाघ के पगमार्क्स के आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। जिन स्थानों पर मवेशियों का शिकार हुआ है, वहां कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं।
शनिवार को धूलमिट्टा मंडल के कुछ गांवों में भी बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली थी। बैरनपल्ली, कूटिगल और बेक्कल गांवों के खेतों में किसानों ने बाघ के पंजों के निशान देखे, जिसके बाद वन विभाग ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जब तक यह पुष्टि न हो जाए कि बाघ इलाके से निकल गया है, तब तक वे सुबह-सुबह अकेले खेतों में न जाएं और पूरी सतर्कता बरतें।
बताया जा रहा है कि यह बाघ पड़ोसी जंगाओं जिले से सिद्धिपेट में दाखिल हुआ है। इससे पहले शनिवार को उसने जंगाओं जिले के अम्मापुर और वेलदंडा गांवों में भी मवेशियों का शिकार किया था। एक दिन पहले रघुनाथपल्ली मंडल के मंडलगुडेम गांव में भी एक बछड़े को मारे जाने की घटना सामने आई थी।
आशंका जताई जा रही है कि यह बाघ महाराष्ट्र से होते हुए तेलंगाना में दाखिल हुआ है।
गौरतलब है कि यह एक सप्ताह से भी कम समय में तेलुगु राज्यों में बाघ की ऐसी दूसरी घटना है। इससे पहले शुक्रवार (6 फरवरी) को आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में वन विभाग ने एक बाघ को पकड़ने में सफलता हासिल की थी, जो राजामुंद्री के आसपास के गांवों में घूमकर मवेशियों को मार रहा था और लोगों में दहशत फैला रहा था। उस बाघ के भी महाराष्ट्र से तेलंगाना और छत्तीसगढ़ होते हुए आंध्र प्रदेश में प्रवेश करने की आशंका जताई गई थी।