16वें वित्त आयोग की सिफारिशों का हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा दीर्घकालिक असर: मुख्यमंत्री सुक्खू ने चेताया

16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा दीर्घकालिक असर: मुख्यमंत्री सुक्खू


शिमला, 8 फरवरी। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का राज्य की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा और इसका असर 2026-27 के बजट में भी साफ तौर पर दिखाई देगा।

मुख्यमंत्री ने यह बात राज्य की वित्तीय स्थिति और राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) समाप्त किए जाने के प्रभावों पर वित्त विभाग की ओर से दी गई प्रस्तुति के बाद कही। उन्होंने कहा कि आरडीजी का खत्म होना किसी एक सरकार का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश के लोगों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है।

सीएम सुक्खू ने कहा, “हम इस मुद्दे को लेकर दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार हैं और इसमें भाजपा के सांसदों व विधायकों को भी साथ आने का न्योता है। एक बार आरडीजी की व्यवस्था समाप्त हो गई, तो प्रदेश के लोगों के अधिकारों को वापस पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।”

उन्होंने कहा कि इस प्रस्तुति में भाजपा विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि देश के 17 राज्यों के लिए आरडीजी समाप्त किया गया है, लेकिन हिमाचल प्रदेश पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा है। राज्य के कुल बजट का करीब 12.7 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से आता था, जो देश में दूसरा सबसे बड़ा अनुपात है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्य की कर संग्रह वृद्धि दर घटकर लगभग 8 प्रतिशत रह गई है, जबकि जीएसटी से पहले यह 13 से 14 प्रतिशत हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि उत्पादक राज्य होने के बावजूद जीएसटी एक उपभोक्ता आधारित कर है, जिससे हिमाचल की अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। साथ ही, जीएसटी के बाद राज्य की कर लगाने की क्षमता भी सीमित हो गई है।

सीएम सुक्खू ने केंद्र सरकार से मांग की कि बिजली परियोजनाओं पर कम से कम 50 प्रतिशत रॉयल्टी सुनिश्चित की जाए और जिन परियोजनाओं का 40 वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उन्हें राज्य को सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के लगभग 4,500 करोड़ रुपये के बकाया का भुगतान 2012 से नहीं किया गया है, जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी आ चुका है।

उन्होंने यह भी बताया कि शानन पावर प्रोजेक्ट की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है और इसे वापस लेने के लिए पंजाब सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संसाधन जुटाने के लिए प्रतिबद्ध है। अपने संसाधनों से सरकार ने 26,683 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है क्योंकि राज्य के पास राजस्व के सीमित स्रोत हैं, जिनमें नदियां, जंगल और पर्यटन प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा, “मैं प्रदेश की जनता को भरोसा दिलाता हूं कि हर कल्याणकारी योजना को जमीन पर उतारा जाएगा, राज्य के संसाधनों को बढ़ाया जाएगा और अपने वैध अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रहेगी।”
 

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