आग की घटना: तेलंगाना फॉरेंसिक लैब ने अहम मामलों में सबूत नष्ट होने से किया इनकार

आग की घटना: तेलंगाना फॉरेंसिक लैब ने अहम मामलों में सबूत नष्ट होने से किया इनकार


हैदराबाद, 8 फरवरी। तेलंगाना पुलिस की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में लगी आग की घटना को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से जुड़े पुराने मामलों समेत किसी भी अहम केस के सबूत नष्ट होने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने आशंका जताई है कि शनिवार को लगी आग में वर्ष 2015 के ‘नोट-फॉर-वोट’ मामले से जुड़े डिजिटल सबूत नष्ट हो सकते हैं, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री का नाम जुड़ा रहा है।

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव ने फोन टैपिंग जैसे “गढ़े हुए राजनीतिक मामलों में सबूतों की कमी को छिपाने” का भी आरोप लगाया।

एफएसएल की निदेशक शिखा गोयल ने रविवार को मीडिया को बताया कि इस संबंध में स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी गई है और आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

आईपीएस अधिकारी ने बताया कि शनिवार सुबह 10.08 बजे आग लगने के बाद एफएसएल स्टाफ ने तुरंत फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की। सभी तकनीकी उपकरणों की बिजली आपूर्ति काट दी गई थी। दमकल कर्मियों ने दोपहर 1.30 बजे तक आग को पूरी तरह बुझा दिया।

उन्होंने बताया कि आग से एफएसएल भवन की पहली मंजिल पर स्थित कुछ सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है, जिनमें कंप्यूटर फॉरेंसिक लैब, लाइब्रेरी और एचआरडी कक्ष शामिल हैं।

शिखा गोयल ने कहा कि आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

उन्होंने कहा, “इस घटना के कारणों और एफएसएल में मौजूद संपत्ति को हुए नुकसान को लेकर बेबुनियाद और निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। मीडिया और सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों में बिना पुष्टि के दावे किए जा रहे हैं।”

एफएसएल निदेशक ने दावा किया कि केस से जुड़ी अधिकांश सामग्री सुरक्षित रूप से बरामद कर ली गई है और उसे उचित सुरक्षा में रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अहम मामलों से संबंधित साक्ष्य पहले ही संबंधित अदालतों में जमा कराए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि 2015 में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज एक मामले को लेकर भी नुकसान के आरोप लगाए गए हैं।

उन्होंने कहा, “इस मामले में एफएसएल को 16 भौतिक साक्ष्य प्राप्त हुए थे और उनकी रिपोर्ट 2015 में ही माननीय एसीबी अदालत में जमा कर दी गई थी। सभी 16 साक्ष्य अदालत को लौटा दिए गए थे। इस मामले से संबंधित कोई भी सामग्री शनिवार को एफएसएल में मौजूद नहीं थी।”

फोन टैपिंग मामले का जिक्र करते हुए शिखा गोयल ने बताया कि मार्च 2024 से जनवरी 2026 के बीच एफएसएल को 136 भौतिक साक्ष्य मिले थे।

उन्होंने कहा, “इनमें से सात को छोड़कर सभी की जांच पूरी कर रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को सौंप दी गई है। शेष सात साक्ष्यों की जांच जारी है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है। ये सभी साक्ष्य सुरक्षित रूप से बरामद कर लिए गए हैं।”
 
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