बलूचिस्तान में पाकिस्तान सेना का तांडव! हिंसक झड़पों के बाद 180 बलूचों को दबोचा, बड़े पैमाने पर कार्रवाई जारी

पाकिस्तानी सेना ने हिंसक झड़पों के बाद 180 बलूच लोगों को हिरासत में लिया


क्वेटा, 8 फरवरी। बलूच विद्रोहियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई जबरदस्त झड़पों के कुछ दिनों बाद, इस्लामाबाद में अधिकारियों ने बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है। रविवार को स्थानीय मीडिया की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, कम से कम 180 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि बलूचिस्तान के कई शहरों में हुए हमलों के बाद फ्रंटियर कॉर्प्स और पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन के दौरान लगभग 180 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने इन ऑपरेशन के दौरान हथियारों और गोला-बारूद का एक बड़ा जखीरा भी बरामद किया। इससे पहले पिछले शनिवार को शुरू हुई कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान कम से कम 216 बलूच विद्रोही मारे गए। हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि चल रहे सिक्योरिटी कैंपेन के दौरान कई आम लोगों की भी जान गई है।

इससे पहले बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने 6 फरवरी को कहा था कि संगठन ने हाल के हमलों के दौरान अपने पहले से तय मकसद को कामयाबी से हासिल कर लिया है।

द बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस कैंपेन को बलूचिस्तान के 14 शहरों को टारगेट करने वाला बताया और इसे समूह का अब तक का सबसे बड़ा, सबसे घातक और सबसे सुनियोजित ऑपरेशन बताया।

बयान के मुताबिक, बलूच लड़ाकों ने कई जगहों पर मिलकर हमले किए और कुछ इलाकों में, सिक्योरिटी पोस्ट, सैन्य ठिकानों और शहरी इलाकों के कुछ हिस्सों पर कंट्रोल करने में कामयाब रहे।

बीएलए प्रवक्ता ने दावा किया कि कई शहरों में बीएलए की इकाई ने लगातार छह दिनों तक अपनी पोजीशन बनाए रखी, जिसे उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को लगातार पीछे हटने के लिए मजबूर करना बताया।

इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस बात को कबूल किया था कि बलूच विद्रोहियों के आगे पाक सेना कमजोर पड़ गई थी।

इस मामले पर नेशनल असेंबली (एनए) में ख्वाजा आसिफ ने कहा, "बलूचिस्तान भौगोलिक दृष्टिकोण से पाकिस्तान का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है। इसे कंट्रोल करना किसी आबादी वाले शहर या इलाके से कहीं ज्यादा मुश्किल है। इसके लिए भारी फोर्स की जरूरत है। हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और उनके (आतंकियों) खिलाफ एक्शन में हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की रखवाली और पेट्रोलिंग करने में वे शारीरिक तौर पर कमजोर हैं।"
 

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