पाकिस्तानी आतंकी संगठन ढांचा पुनर्निर्माण और नई भर्ती में जुटे: रिपोर्ट

पाकिस्तानी आतंकी संगठन ढांचा पुनर्निर्माण और नई भर्ती में जुटे: रिपोर्ट


एथेंस, 9 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) गाजा में जारी संकट का फायदा उठाकर अपने आतंकी ढांचे के पुनर्निर्माण और भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नए कैडर की भर्ती में जुटे हैं। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की राज्य एजेंसियों ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ), जो धन शोधन और आतंक वित्तपोषण पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था है, की निगरानी व्यवस्था में मौजूद खामियों की पहचान की है। इसके बाद, पाकिस्तान के आखिरी ग्रे-लिस्टिंग के अनुभव से सबक लेते हुए आतंकी संगठनों ने अपने फंडिंग के तौर-तरीकों में बदलाव किया है।

एथेंस स्थित थिंक टैंक ‘जियोपॉलिटिको’ की रिपोर्ट में कहा गया है, “पाकिस्तान में एक खतरनाक प्रवृत्ति सामने आ रही है, जहां संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा गाजा राहत के नाम पर धन जुटाकर उसे आतंकी गतिविधियों में लगा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि जैश प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के सदस्यों की भी इन नए वित्तपोषण अभियानों में सीधी भूमिका सामने आई है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि एफएटीएफ जैसे अंतरराष्ट्रीय निगरानी संगठनों की नजरों से बचने के लिए इन आतंकी संगठनों ने अपना ‘मोडस ऑपरेंडी’ बदल लिया है। अब ये संगठन बैंक खातों के बजाय सीधे डिजिटल वॉलेट्स में धन एकत्र कर रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय जांच से बचा जा सके।

रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए इज़राइल-हमास युद्ध ने पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों को अपने फंड जुटाने के प्रयास तेज करने का एक सुविधाजनक बहाना दे दिया है।

जियोपॉलिटिको ने रिपोर्टों के हवाले से बताया कि मसूद अजहर का बेटा हम्माद अजहर और भाई तल्हा अल-सैफ गाजा सहायता के नाम पर आतंक के लिए धन जुटाने की मुहिम का नेतृत्व कर रहे हैं। इसके लिए वे ईज़ीपैसा, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल वॉलेट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन दोनों को धार्मिक कार्यों, 300 से अधिक मस्जिदों के पुनर्निर्माण, नमाज़ की चटाइयों और अन्य सुविधाओं के नाम पर इकट्ठा किया जा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये आतंकी संगठन 1990 के दशक से ही खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों में बसे पाकिस्तानी प्रवासी नेटवर्क के जरिए फर्जी चैरिटी संगठनों के माध्यम से धन जुटाते रहे हैं। राहत कार्यों के नाम पर एकत्रित इस धन का बड़ा हिस्सा जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने और 2008 के मुंबई हमलों जैसे बड़े आतंकी हमलों में इस्तेमाल किया गया।
 
यह अत्यंत चिंताजनक है कि कैसे ये आतंकी संगठन वैश्विक मानवीय संकटों और डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग कर अपनी ताकत बढ़ाने में जुटे हैं। एफएटीएफ की सख्ती के बावजूद फंडिंग के लिए नए रास्ते तलाशना और गाजा राहत के नाम पर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना इनकी खतरनाक मंशा को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन डिजिटल वॉलेट्स और छद्म चैरिटी संगठनों पर और अधिक कड़ाई से निगरानी रखने की जरूरत है, ताकि आतंकवाद की इस नई ‘मोडस ऑपरेंडी’ को समय रहते कुचला जा सके।
 

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