हिमंत बिस्वा की 'सुपर फ्लॉप' प्रेस कॉन्फ्रेंस पर गोगोई का हमला, बोले- 12 हजार बीघा जमीन का हिसाब दो

'मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस सुपर फ्लॉप', गौरव गोगोई ने दिया हिमंत बिस्वा सरमा के आरोपों पर जवाब


गुवाहाटी, 8 फरवरी। असम कांग्रेस प्रमुख और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने रविवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को 'सुपर फ्लॉप' बताते हुए कहा कि असम में कोई भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "हिमंत बिस्वा सरमा ने स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया के सामने स्टेज पर खुद को शर्मिंदा किया है। ढाई घंटे की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भी कमरे में मौजूद पत्रकार संतुष्ट नहीं हुए। असम में कोई भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं ले रहा है।"

कांग्रेस सांसद ने आगे लिखा, "उन्हें (हिमंत बिस्वा सरमा को) यह बताना चाहिए कि उन्होंने और उनके परिवार ने पूरे असम में 12 हजार बीघा या 4 हजार एकड़ की कीमती जमीन कैसे हासिल की। जब हम सत्ता में आएंगे, तो हम उन जमीनों को लेकर गरीबों और भूमिहीनों में बांट देंगे।"

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, "मुझे दिल्ली और असम के उन पत्रकारों पर दया आती है जिन्हें सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस झेलनी पड़ी। यह एक सी-ग्रेड सिनेमा से भी बदतर था। तथाकथित राजनीतिक रूप से चतुर मुख्यमंत्री ने सबसे फर्जी मुद्दे उठाए। यह सुपर फ्लॉप हमारी यात्रा के बिल्कुल उलट है, जो मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों की ओर से कब्जा की गई 12 हजार बीघा जमीन का खुलासा करने में हिट रही है।"

इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और एलिजाबेथ गोगोई, जो लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई की पत्नी हैं, से जुड़े आरोप बहुत गंभीर प्रकृति के हैं और इन्हें मामूली मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए। हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि एक मौजूदा सांसद की संलिप्तता ने इस मुद्दे को एक सामान्य जांच के दायरे से ऊपर उठा दिया है।

हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि मामले की शुरुआती जांच एसआईटी ने की, जिसने अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। इसके आधार पर सीआईडी पुलिस थाने में एक औपचारिक मामला दर्ज किया गया ताकि आगे की जांच की जा सके। मुख्यमंत्री के अनुसार, एसआईटी की रिपोर्ट को असम कैबिनेट के सामने रखा गया। कैबिनेट ने पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की और यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपों की गंभीरता, संवेदनशीलता और दूरगामी असर को देखते हुए इसकी जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि असम सरकार इस मामले को औपचारिक रूप से गृह मंत्रालय के पास भेजेगी। गृह मंत्रालय की सहमति मिलने के बाद ही केस को केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा।
 

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