अश्विनी वैष्णव: भारत की AI रणनीति लाई रंग, स्वदेशी सर्वम मॉडल ने आलोचकों को भी किया हैरान

भारत की सॉवरेन एआई मॉडल स्ट्रैटेजी नतीजे दे रही है: अश्विनी वैष्णव


नई दिल्ली, 8 फरवरी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कहा कि सॉवरेन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल स्ट्रैटेजी नतीजे दे रही है। इस दौरान उन्होंने घरेलू स्टार्टअप सर्वम एआई द्वारा जारी किए गए एक एडवांस्ड मॉडल की तारीफ की।

पिछले साल, इस स्टार्टअप को देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) फाउंडेशनल मॉडल बनाने के लिए चुना गया था। 67 प्रपोजल में से सर्वम एआई को भारत का पहला स्वदेशी फाउंडेशनल मॉडल बनाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था।

वैष्णव ने एक्स पोस्ट में कहा, "हमारे एआई मिशन के हिस्से के रूप में सर्वम द्वारा जारी किए गए टेक्नोलॉजी में एडवांस्ड मॉडल की सबसे ज्यादा आलोचना करने वाले लोग भी तारीफ कर रहे हैं। हमारे स्मार्ट युवा इंजीनियर मटेरियल साइंस, हेल्थकेयर और साइबर सिक्योरिटी में ऐसे इनोवेशन पर काम कर रहे हैं, जिन्हें दुनिया पाथब्रेकिंग मॉडल के तौर पर देखेगी।"

सर्वम एआई ने भारतीय भाषाओं के लिए सबसे अच्छे टेक्स्ट-टू-स्पीच, स्पीच-टू-टेक्स्ट और ओसीआर मॉडल बनाए हैं।

पिछले साल दिसंबर में सर्वम एआई के को-फाउंडर प्रत्युष कुमार ने इंडियाएआई मिशन के तहत मल्टीलिंगुअल एआई सिस्टम दिखाए, जिसमें भारतीय भाषाओं के लिए भारत का पहला सॉवरेन फाउंडेशनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) भी शामिल था।

भारत के एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने 2024 में 10,300 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ इंडिया एआई मिशन को मंजूरी दी। अगले पांच सालों में मिलने वाली यह फंडिंग इंडियाएआई मिशन के अलग-अलग हिस्सों को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

पिछले महीने पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स से सामाजिक भलाई के लिए एआई का इस्तेमाल करने का आग्रह किया। 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर भारतीय एआई स्टार्टअप्स के साथ एक राउंडटेबल की अध्यक्षता करते हुए, प्रधानमंत्री ने एआई को सस्ता, समावेशी और पारदर्शी बनाने का आग्रह किया।

पीएम मोदी ने बताया कि भारत 16 से 20 फरवरी तक 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' की मेज़बानी करेगा, जिसके ज़रिए देश टेक्नोलॉजी सेक्टर में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि भारतीय एआई मॉडल अलग होने चाहिए और उन्हें स्थानीय और स्वदेशी कंटेंट और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देना चाहिए।
 
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