सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को घेरा: केरल में जमात-ए-इस्लामी से सहयोग 'तुष्टिकरण की अंधी दौड़' है

सुधांशु त्रिवेदी ने केरल में जमात-ए-इस्लामी के साथ सहयोग लेने के बयान पर कांग्रेस पर साधा निशाना


नई दिल्‍ली, 7 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ सुधांशु त्रिवेदी ने केरल में जमात-ए-इस्लामी के साथ सहयोग लेने के बयान पर कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने जो बजट प्रस्तुत किया, वो ‘मां, माटी, मानुष’ के बजाय ‘मौलवी, मुअज्जम और मदरसा’ केंद्रित बजट था, और इंडी गठबंधन तुष्टिकरण की अंधी दौड़ में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

केरल में कांग्रेस नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी. सतीशन ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी से सहयोग लेने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उल्लेखनीय है कि केरल में कांग्रेस का गठबंधन मुस्लिम लीग के साथ है और यह वही मुस्लिम लीग है जिसकी स्थापना मोहम्मद अली जिन्ना ने की थी और जिसने देश का विभाजन कराया।

कांग्रेस बचने का प्रयास नहीं कर सकती, क्योंकि आज की ऑल इंडिया यूनियन मुस्लिम लीग के संस्थापक पीके पोकर साहब बहादुर और मोहम्मद इस्माइल, जिन्ना की मद्रास प्रेसिडेंसी इकाई से जुड़े थे, जहां जिन्ना को ‘कायदे आजम’ और मोहम्मद इस्माइल को ‘कायदे मिल्लत’ कहा जाता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट कहा है कि आज कांग्रेस पार्टी मुस्लिम लीगी-माओवादी पार्टी हो चुकी है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि कांग्रेस पार्टी अब लीग कांग्रेस से आगे बढ़कर जमाती कांग्रेस हो गई है। लीग तो फिर भी एक राजनीतिक दल थी, जबकि जमात तो एक सांप्रदायिक संगठन है। यह जमात-ए-इस्लामी उस विचारधारा का प्रचार करती है, जिसमें भारत को इस्लामिक राज्य बनाने की बात कही जाती है। इससे पूर्व भी पिछले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस फुरफुरा शरीफ के पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ गठबंधन कर चुकी है। तेलंगाना में रेवंत रेड्डी का भी बहुचर्चित, सुविख्यात और कुख्यात बयान आ चुका है, जिसमें उन्होंने जुबली हिल्स चुनाव में कहा कि कांग्रेस मतलब मुसलमान, मुसलमान मतलब कांग्रेस और कांग्रेस की ताकत मुसलमान, मुसलमान की ताकत कांग्रेस। अब तेलंगाना से केरल जाते-जाते कांग्रेस ने एक कदम आगे किया कि अब जमात मतलब मुसलमान और जमात की ताकत मतलब कांग्रेस की ताकत।

उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस जवाब दे कि यह जमाती समर्थन के बदले कौन सी कयामती चीजों का केरल की जनता को भविष्य में सामना करना पड़ सकता है? इससे यह भी स्पष्ट होता है कि राहुल गांधी ने केरल से चुनाव लड़ने का निर्णय किन राजनीतिक कारणों से लिया। राहुल गांधी ने विदेश में दिए अपने वक्तव्य में मुस्लिम लीग को पूर्णतः सेक्युलर बताया था और उसके साथ कोई समस्या न होने की बात कही थी। आज की परिस्थितियां उसी बयान की पृष्ठभूमि को और स्पष्ट करती हैं।

भाजपा सांसद ने कहा कि वर्ष 2023 में कर्नाटक में एसडीपीआई के एक जनरल सेक्रेटरी ने दावा किया था कि वर्ष 2018 में पीएफआई के साथ एक अंडरस्टैंडिंग हुई थी। यह दावा स्वयं एसडीपीआई ने किया था। इस प्रकार का विघटनकारी तुष्टीकरण की सीमा तक पहुंच चुका तथाकथित अल्पसंख्यकवाद केरल के लिए एक बड़ी चुनौती है।

उन्‍होंने कहा कि केरल की जनता इसे भली-भांति समझ रही है और अब चेहरों से नकाब पूरी तरह उतर चुका है। कांग्रेस आगाह हो कि जमात के साथ के खेल में बड़ी-बड़ी करामात होती हैं। बांग्लादेश में वर्ष 2001 में बांग्लादेश नेशनल पार्टी ने जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन कर उसे वैधता दी थी और कैबिनेट में स्थान दिया, लेकिन आज वही जमात-ए-इस्लामी बीएनपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। कांग्रेस को इस तथ्य को समझना चाहिए। राज्यसभा के नेता सदन एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा था कि अबोध बालक की बुद्धि का बंधक बनने से बचने का प्रयास करना चाहिए और केरल को गंभीर संकट में जाने से रोकने के लिए राज्य की जनता को एकजुट होना चाहिए।
 

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