मध्य प्रदेश: नर्मदापुरम के वन क्षेत्र में खौफनाक मंजर, क्षत-विक्षत मिला युवक का शव, बाघ के हमले का शक

मध्य प्रदेश के वन क्षेत्र में शख्स पर जानलेवा हमला, बाघ के होने का शक


भोपाल/पिपरिया, 7 फरवरी। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की पिपरिया तहसील अंतर्गत बंखेड़ी प्रादेशिक वन क्षेत्र में एक संदिग्ध बाघ के हमले में 39 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई।

वन अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस घटना में बाघ शामिल था या कोई अन्य जंगली जानवर। मृतक की पहचान कमल ठाकुर के रूप में हुई है, जो बारी देवी गांव का निवासी था। उसका शव पुराने डोक्रीखेड़ा गांव के डैम मोहल्ला झिरिया से लगभग 100 मीटर की दूरी पर झाड़ियों के बीच से बरामद किया गया।

वन विभाग के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि शनिवार तड़के कमल ठाकुर का शव उनके घर से करीब 100 मीटर दूर झाड़ियों में मिला। शव की हालत बेहद क्षत-विक्षत थी, जिससे किसी हिंसक मुठभेड़ की आशंका जताई जा रही है। अधिकारी के मुताबिक, एक स्थानीय दूधवाले ने सबसे पहले शव के अवशेष देखे और इसकी सूचना परिवार को दी, जिसके बाद तत्काल वन विभाग को जानकारी दी गई।

वरिष्ठ वन अधिकारियों ने बताया कि हमला संभवतः शनिवार तड़के हुआ होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह तेंदुए का हमला भी हो सकता है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि किस जंगली जानवर ने हमला किया। वन विभाग की टीमों ने आसपास के इलाके में बाघ और तेंदुए दोनों के पदचिह्न देखे हैं।

बताया गया है कि कमल ठाकुर पचमढ़ी में सेना अधिकारियों के मेस में रसोइए के रूप में कार्यरत थे और सप्ताहांत के दौरान अक्सर अपने पैतृक गांव आया-जाया करते थे। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बारी देवी और झिरिया गांव के आसपास पहले भी बाघों को देखे जाने और उनकी गतिविधियों की जानकारी वन विभाग को दी जा चुकी है। यह घटना इस सीमावर्ती वन क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की ओर इशारा करती है।

इस बीच पिपरिया के तहसीलदार वैभव बैरागी ने आईएएनएस को बताया कि मृतक के परिवार को 8 लाख रुपए की मुआवजा राशि दिए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, अंतिम संस्कार और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए परिवार को 25 हजार रुपए की अंतरिम राहत भी प्रदान की गई है। वन विभाग और प्रशासन की टीमें घटनास्थल की गहन जांच कर रही हैं और जानवरों के पैरों के निशानों से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। मृत्यु के सटीक कारण जानने के लिए शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
 

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