पटना, 7 फरवरी। बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बिहार को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग की मांग की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत बिहार की भौगोलिक, जलवायु एवं कृषि संरचना को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए एक विशेष दलहन पैकेज आवश्यक है।
दरअसल, कृषि मंत्री शनिवार को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र से देश की दलहन नीति एवं किसान-केंद्रित कृषि विमर्श में भाग ले रहे थे। इस मौके पर कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे।
मंत्री रामकृपाल ने कहा कि अरहर, चना, मसूर, उड़द एवं मूंग को बिहार की राज्य-विशेष दलहन फसलों के रूप में चिन्हित किया जाना चाहिए। साथ ही, राज्य में दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के सीड हब की स्थापना तथा 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से उच्च उत्पादक, अल्प अवधि एवं रोग-रोधी बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि दलहन उत्पादन में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए क्लस्टर आधारित खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत बिहार में ब्लॉक एवं क्लस्टर आधारित कार्यक्रमों को विशेष रूप से लागू करते हुए प्रति क्लस्टर सिंचाई, बीज, कृषि यंत्र एवं प्रशिक्षण का समेकित पैकेज उपलब्ध कराया जाए। सूक्ष्म सिंचाई एवं जल संरक्षण को प्रोत्साहित करते हुए दलहन क्षेत्रों में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर पर 90 प्रतिशत तक केंद्रीय अनुदान तथा वर्षा-आधारित क्षेत्रों में फार्म पोंड एवं जल संचयन को मिशन से जोड़ा जाए।
मंत्री ने दलहन बुआई, कटाई एवं थ्रेसिंग के लिए विशेष कृषि यंत्रों पर अतिरिक्त केंद्रीय सहायता देने, कस्टम हायरिंग सेंटर को दलहन मिशन से जोड़ने तथा दलहनी फसलों की एमएसपी पर प्रभावी एवं सुनिश्चित खरीद व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके लिए नाफेड एवं एफसीआई के माध्यम से स्थायी खरीद केंद्रों की स्थापना की मांग की।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024–25 में राज्य में 4.48 लाख हेक्टेयर में दलहन की खेती से 3.93 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ, फिर भी मांग की पूर्ति के लिए बाहरी निर्भरता बनी हुई है।