नई दिल्ली, 7 फरवरी। देवों के देव... महादेव को सृजन, संहार और पालन का देव माना जाता है। उनकी महिमा हर जगह फैली हुई है। उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और रूद्र का मिलाजुला स्वरूप भी माना जाता है। महादेव सिर्फ शक्ति और क्रोध के देवता नहीं हैं, बल्कि ध्यान, तप और योग के आदर्श भी हैं। उनकी साधना, उनके आभूषण और उनके रूप में कई गहरे रहस्य छिपे हैं, जो हमारी आत्मा और ब्रह्मांड के संबंध को समझने में मदद करते हैं।
सबसे पहले आते हैं वासुकी, जो उनके गले में नाग के रूप में लिपटा हुआ है। वासुकी सिर्फ सजावट नहीं है। यह नाग काम, क्रोध और मोह के बंधनों को नियंत्रित करने की शक्ति का प्रतीक है। जब महादेव के गले में वासुकी लिपटा होता है तो इसका मतलब है कि वे सभी नकारात्मक शक्तियों को नियंत्रित करने में सक्षम हैं। यही नहीं, वासुकी समुद्र मंथन में भी एक महत्वपूर्ण पात्र रहा, जो देवताओं और असुरों को जोड़ने का काम करता है।
फिर है उनके सिर पर चंद्रमा। अर्धचंद्र सिर्फ सजावट नहीं है, बल्कि यह मन पर नियंत्रण और समय के चक्र का प्रतीक है। चंद्रमा की तरह हमारे जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन अगर हम अपने मन को शांत और नियंत्रित रखें तो हर चुनौती आसान हो जाती है।
महादेव की जटाओं में बहता गंगा का जल भी एक खास आभूषण है। गंगा का प्रवाह निरंतरता, पवित्रता और ज्ञान का प्रतीक है। जैसे गंगा का पानी जीवन में शुद्धता लाता है, वैसे ही हमारे जीवन में ज्ञान और सत्कर्मों का प्रवाह हमें शुद्ध और ऊर्जावान बनाता है। यही वजह है कि महादेव ज्ञान और करुणा के मार्गदर्शक भी माने जाते हैं।
महादेव के गले में पहनी रुद्राक्ष माला भी बहुत खास है। यह माला ध्यान, साधना और ब्रह्मांड से जुड़ाव का प्रतीक है। कहते हैं कि जो व्यक्ति रुद्राक्ष का महत्व समझकर उसका सही प्रयोग करता है, उसके मन और आत्मा में संतुलन और शांति बनी रहती है।
महादेव का शरीर जो भस्म से ढका रहता है, वह सबसे गहरा संदेश देता है। भस्म वैराग्य और इस नश्वर संसार की सच्चाई का प्रतीक है। यह बताती है कि सांसारिक वस्तुएं अस्थायी हैं और हमें अपने अंदर की स्थायी शक्ति और आत्मा पर ध्यान देना चाहिए।