त्रिवेंद्रम, 7 फरवरी। केरल के मुख्यमंत्री पिन्नाराई विजयन ने शनिवार को स्पष्ट किया कि राज्य में किसी भी स्थिति में नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) लागू नहीं किया जाएगा।
2027 में होने वाली देशव्यापी जनगणना के करीब आने के साथ ही एलडीएफ सरकार ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें सुनिश्चित किया गया है कि एनपीआर के लिए कोई डेटा एकत्र नहीं किया जाएगा। यह फैसला 2019 से राज्य के मजबूत रुख को बनाए रखने के लिए लिया गया है।
सीएम विजयन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके लिखा, "एलडीएफ सरकार फिर से दोहराती है कि केरल में किसी भी हालत में एनपीआर लागू नहीं किया जाएगा। जैसे-जैसे देशव्यापी जनगणना 2027 करीब आ रही है, हमने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है ताकि यह पक्का हो सके कि एनपीआर के लिए कोई डेटा इकट्ठा न किया जाए, और 2019 से हमारे मजबूत रुख को बनाए रखा जा सके।"
उन्होंने बताया, "केरल पहला राज्य था जिसने सुप्रीम कोर्ट में गैर-संवैधानिक सीएए को चुनौती दी और इसके खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास किया। हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और एनपीआर/एनआरसी जैसी भेदभावपूर्ण प्रक्रियाओं को अपने लोगों के लिए खतरा नहीं बनने देंगे।"
राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन (प्रोटोकॉल) विभाग ने 5 फरवरी को असाधारण गजट में अधिसूचना जारी की, जिसमें कहा गया कि 20 दिसंबर 2019 से एनपीआर अपडेशन से जुड़ी सभी गतिविधियां राज्य में निलंबित रहेंगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया कि यह कदम हाल के संघीय बजट में एनपीआर और जनगणना 2027 के लिए 6,000 करोड़ रुपए के आवंटन के बाद उठाया गया है, ताकि कोई अस्पष्टता न रहे। 2019 में सीएए लागू होने के साथ ही केरल ने एनपीआर प्रक्रिया रोक दी थी, क्योंकि इसे एनआरसी से जुड़ा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभावपूर्ण माना जाता है।
केरल ने सीएए के खिलाफ सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया। एलडीएफ सरकार का कहना है कि एनपीआर/एनआरसी जैसी प्रक्रियाएं संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं और राज्य के लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं।