कोलकाता, 7 फरवरी। शनिवार को सदन के बजट सत्र के अंतिम दिन पश्चिम बंगाल विधानसभा में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सत्ता पक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की विधायक और फैशन डिजाइनर से राजनेता बनीं अग्निमित्रा पॉल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव शुक्रवार को सदन में उनके द्वारा की गई एक टिप्पणी के खिलाफ था, जिससे अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत हुई थीं।
शनिवार को राज्य के कृषि एवं संसदीय कार्य मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय द्वारा पॉल के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद भाजपा विधायकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
भाजपा विधायक मिहिर गोस्वामी ने कहा कि हमारी विधायक अपने बयान पर स्पष्टीकरण देना चाहती थीं। सदन अध्यक्ष द्वारा अनुमति दिए जाने के बाद उन्होंने स्पष्टीकरण भी दिया। लेकिन फिर भी उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया गया। यह अल्पसंख्यक समुदाय के मंत्रिमंडल सदस्यों के आग्रह पर किया गया।
पहले भाजपा विधायकों ने सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन किया और बाद में नारे लगाते हुए सदन से बाहर चले गए। सदन से बाहर आने के बाद उन्होंने विधानसभा के मैदान में भी नारे लगाते हुए अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
सदन के अध्यक्ष बिमान बंदोपाध्याय ने विशेषाधिकार हनन से संबंधित प्रस्ताव को विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को भेज दिया है, जो इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगी।
शनिवार को पश्चिम बंगाल सरकार ने मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर मुर्शिदाबाद महाराजा कृष्णनाथ विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव भी पेश किया। यह प्रस्ताव पारित हो गया।
मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय अधिनियम, 2018 के तहत कृष्णनाथ कॉलेज को उन्नत करके की गई थी। कृष्णनाथ कॉलेज, पश्चिम बंगाल के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक है, जिसकी स्थापना 1853 में बरहामपुर में हुई थी। इस कॉलेज की स्थापना महाराजा कृष्णनाथ ने सामाजिक सुधार, शिक्षा और सांस्कृतिक समन्वय की भावना को मूर्त रूप देने के लिए की थी।
उनके नाम पर विश्वविद्यालय का नाम बदलने से इसे एक विशिष्ट और गौरवपूर्ण ऐतिहासिक पहचान मिलती है, जो इसे अन्य राज्य विश्वविद्यालयों से अलग करती है और इसे सही ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में मजबूती से स्थापित करती है।