कोलकाता, 7 फरवरी। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित देबेन महता गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (डीएमजीएमसीएच) में रैगिंग की एक गंभीर घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। कॉलेज प्रशासन ने 7 फरवरी 2026 को जारी एक आधिकारिक मेमो के माध्यम से दो सीनियर एमबीबीएस छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा की है।
घटना की शिकायत पीड़ित छात्र महबूब इस्लाम (एमबीबीएस बैच 2025-2030) की मां मलीना खातून ने की थी। एंटी-रैगिंग कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर पाया गया कि दूसरे और चौथे वर्ष के दो छात्रों ने पहले वर्ष के छात्र के साथ रैगिंग की, जिसमें मारपीट शामिल थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़ित छात्र को पीठ पर गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। यह घटना 1 फरवरी 2026 के आसपास हुई बताई जा रही है।
प्रिंसिपल द्वारा जारी मेमो में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अयान बागची (एमबीबीएस बैच 2021-2026) और ऋषभ कुमार सिंह (एमबीबीएस बैच 2024-2029) को तुरंत हॉस्टल के कमरे खाली करने होंगे। उन्हें पूरे मेडिकल कोर्स के दौरान कॉलेज हॉस्टल में प्रवेश नहीं मिलेगा। दोनों छात्रों को अगले दो वर्षों तक सभी शैक्षणिक गतिविधियों (कक्षाएं, परीक्षाएं, प्रैक्टिकल आदि) से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है।
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी की एंटी-रैगिंग गाइडलाइंस के अनुरूप बताई जा रही है। मेमो की प्रतियां मेडिकल सुपरिंटेंडेंट कम वाइस प्रिंसिपल, एंटी-रैगिंग कमेटी सदस्यों, पुरुलिया मफस्सिल पुलिस स्टेशन, दोनों आरोपी छात्रों, उनके पिताओं और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजी गई हैं।
पुरुलिया मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि रैगिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। यह घटना राज्य में मेडिकल शिक्षा संस्थानों में रैगिंग की समस्या को फिर से उजागर करती है।
पीड़ित छात्र के परिवार ने न्याय की मांग की है, जबकि आरोपी छात्रों के परिवारों से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। यह मामला मेडिकल छात्रों के बीच सुरक्षा और अनुशासन के मुद्दे को गंभीरता से उठाता है।