अनुच्छेद 370 के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास की बहार, PoK महंगाई-दमन के 'राजनीतिक ब्लैक होल' में धंसा

जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार तेज, पीओके बना ‘राजनीतिक ब्लैक होल’


वॉशिंगटन, 6 फरवरी। अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिली विशेष स्थिति समाप्त किए जाने के बाद क्षेत्र के विकास का रास्ता खुला, जहां भारत ने विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया और समावेशी शासन को बढ़ावा दिया। वहीं, नियंत्रण रेखा (एलओसी) के उस पार पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इलाके महंगाई, दमन और राजनीतिक जड़ता में फंसे हुए हैं।

शुक्रवार को आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में दिख रहा विकास का परिदृश्य पिछले 70 वर्षों से चले आ रहे पाकिस्तानी दुष्प्रचार का करारा जवाब है।

यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, एलओसी के दोनों ओर का फर्क साफ नजर आता है। एक ओर जम्मू-कश्मीर वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी कर रहा है और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य व्यवस्था खड़ी कर रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) एक “राजनीतिक ब्लैक होल” बना हुआ है, जहां पाकिस्तान में जबरन विलय पर सवाल उठाना भी दंडनीय अपराध माना जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया, “वर्ष 2019 भारत के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था। अनुच्छेद 370 का हटाया जाना केवल एक कानूनी बदलाव नहीं था, बल्कि उस दीवार को गिराना था, जिसने लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर के लोगों को भारतीय प्रगति की धड़कन से अलग-थलग रखा। आज श्रीनगर के चहल-पहल भरे बाजारों और जम्मू के औद्योगिक केंद्रों में पुनर्जागरण की कहानी दिखती है। इसके उलट एलओसी के पार पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हालात शोषण, बढ़ते असंतोष और गिरती अर्थव्यवस्था के हैं।”

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव, जिनमें 63 प्रतिशत मतदान हुआ, एक निर्णायक कसौटी साबित हुए। इसमें जनता ने स्पष्ट रूप से “बंदूक के बजाय मतपत्र” को चुना।

रिपोर्ट के मुताबिक, “यह सिर्फ एक चुनाव नहीं था, बल्कि उस पाकिस्तान प्रायोजित नैरेटिव का सार्वजनिक अंत था, जिसमें कहा जाता रहा कि ‘कश्मीरी भारतीय लोकतंत्र को खारिज करते हैं।’ महिलाएं, युवा और पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी जैसे हाशिए पर रहे समुदाय, जिन्हें अनुच्छेद 370 के तहत 70 वर्षों तक मतदान का अधिकार नहीं मिला था, पहली बार समान नागरिक के रूप में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके।”

अनुच्छेद 370 हटने के बाद की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक, रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय उग्रवाद में तेज गिरावट है। विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया कि सीमा पार से फंडिंग के चलते कभी साप्ताहिक रूप से होने वाला पत्थरबाजी का चलन अब शून्य पर आ गया है।

रिपोर्ट में कहा गया, “हालांकि पाकिस्तान समर्थित ‘हाइब्रिड आतंकी’ अप्रैल 2025 के पहलगाम जैसे दुखद घटनाक्रमों के जरिए हताश कोशिशें करते रहे हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में भर्ती ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। कश्मीरी युवा अब बंदूक नहीं, बल्कि लैपटॉप उठा रहे हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, श्रीनगर में स्टार्टअप इनक्यूबेटर और जम्मू के औद्योगिक क्षेत्र अब भविष्य की नई लड़ाई के मैदान हैं। पाकिस्तान की कट्टरपंथी एजेंडे को इस कदर खारिज किया जा चुका है कि दूरदराज के गांवों में भी लोग विदेशी घुसपैठियों की पहचान में सुरक्षा बलों का सहयोग कर रहे हैं। इसी शांति का नतीजा है कि 2024 में जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की संख्या 2.3 करोड़ से अधिक पहुंच गई।
 

Similar threads

Forum statistics

Threads
4,428
Messages
4,460
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top