नई दिल्ली, 6 फरवरी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस), खड़की, पुणे में तैनात असिस्टेंट गैरिसन इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगने और लेते हुए गिरफ्तार किया है।
आरोपियों की पहचान असिस्टेंट गैरिसन इंजीनियर सुनील निकम और जूनियर इंजीनियर सुरेश म्हस्के के रूप में हुई है।
सीबीआई ने 3 फरवरी को दर्ज शिकायत के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दोनों अधिकारी 6 लाख रुपए की रिश्वत की मांग कर रहे थे। शिकायतकर्ता के पास एक निजी कंपनी के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी है, जो एमईएस का एक कॉन्ट्रैक्ट कार्य कर रही है। कार्य पूरा होने और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जमा करने के बावजूद भुगतान रोक दिया गया था और रिश्वत देने का दबाव बनाया जा रहा था।
सीबीआई के अनुसार, बातचीत के बाद आरोपी अधिकारियों ने रिश्वत की राशि घटाकर 2 लाख रुपए लेने पर सहमति जताई, जिसे पहली किस्त के रूप में लिया जाना था।
इसके बाद सीबीआई ने 5 फरवरी को जाल बिछाया और जूनियर इंजीनियर को शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया। रिश्वत की रकम उसके कार्यालय से बरामद की गई। इस मामले की साजिश में भूमिका पाए जाने पर असिस्टेंट गैरिसन इंजीनियर को भी गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई ने आरोपियों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर तलाशी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ 1,88,500 रुपए की बिना हिसाब की नकदी भी बरामद की है। जांच एजेंसी ने बताया कि इस मामले की जांच अभी जारी है।
वहीं, इससे पहले, सीबीआई ने रिश्वतखोरी के एक गंभीर मामले में एक रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट और दो इंस्पेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला 3 फरवरी को गुवाहाटी के एडिशनल कमिश्नर, सीजीएसटी की शिकायत पर दर्ज किया गया।
आरोप है कि ये अधिकारी मिजोरम के चम्फाई में कस्टम प्रिवेंटिव फोर्स (सीपीएफ) में तैनात रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर रहे थे। 2022-2023 के दौरान उन्होंने बिना किसी दस्तावेज या कानूनी प्रक्रिया के सुपारी, सिगरेट जैसे तस्करी का सामान जब्त किया और संबंधित लोगों से अवैध रिश्वत मांगी। अलग-अलग मामलों में कुल 35 लाख रुपए से ज्यादा की रिश्वत लेने के बाद जब्त सामान छोड़ दिया गया।