भुवनेश्वर, 6 फरवरी। ओडिशा पुलिस को माओवादी विरोधी अभियानों में बड़ी सफलता मिली है। राज्य पुलिस मुख्यालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि रायगड़ा और कंधमाल जिलों में कुल 19 माओवादियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। यह घटना केंद्र सरकार की 31 मार्च तक देश से लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (एलडब्ल्यूई) को पूरी तरह खत्म करने की समयसीमा से ठीक पहले हुई है, जिससे ओडिशा में माओवादी गतिविधियों पर बड़ा झटका लगा है।
भुवनेश्वर में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुराना ने बताया कि रायगड़ा जिले में बंसधारा-घुमुसर-नागावली (बीजीएन) डिवीजन के 15 माओवादी कैडरों ने हथियार डाल दिए। इनमें दो राज्य समिति सदस्य, जगतसिंहपुर के निखिल उर्फ निरंजन राउत और कटक जिले की टांगी की अंकिता उर्फ रश्मिता लेंका, शामिल थे।
यह दंपति लंबे समय से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय था, और इन दोनों पर कुल 55 लाख रुपए का इनाम घोषित था। निखिल राउत रायगड़ा-गजपति-कंधमाल क्षेत्र में दो दशकों से अधिक समय से सक्रिय रहा है। इन 15 कैडरों के सरेंडर के साथ पुलिस ने 14 आधुनिक हथियार जब्त किए, जिनमें 2 एके-47 राइफल, 5 एसएलआर राइफल, 1 स्टेन गन, 1 इंसास राइफल, 1 .303 राइफल और 4 सिंगल-शॉट बंदूकें शामिल हैं।
इसी दिन कंधमाल जिले में कालाहांडी-कंधमाल-बौध-नयागढ़ (केकेबीएन) डिवीजन के चार माओवादी कैडरों ने सरेंडर किया। ये सभी पार्टी मेंबर स्तर के थे और मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के सुकमा, बीजापुर तथा दंतेवाड़ा जिलों से थे। सरेंडर करने वालों में, गंगा कुंजमी उर्फ जितेन, मुचाकी मासे उर्फ सुमित्रा, चोमाली कुंजाम उर्फ शांतिला और बांदी माडवी उर्फ मालती शामिल हैं। इनके पास से एक एसएलआर, एक 12-बोर बंदूक, दो .303 राइफलें और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद जब्त किया गया। इन पर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में कई आपराधिक मामले लंबित थे।
डीजीपी खुराना ने कहा कि राज्य सरकार की सरेंडर, पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति काफी प्रभावी साबित हो रही है। इस नीति के तहत सरेंडर करने वालों को सुरक्षा, आर्थिक सहायता, शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर दिए जाते हैं। उन्होंने बाकी माओवादियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की।
पिछले कुछ महीनों में ओडिशा पुलिस के लगातार अभियानों से कई जिलों में माओवादी नेटवर्क कमजोर हुआ है। सीनियर कैडरों की गिरफ्तारी, सरेंडर और हथियारों की बड़ी जब्ती से विद्रोही आंदोलन को गहरा नुकसान पहुंचा है। पुलिस का लक्ष्य 31 मार्च तक ओडिशा को पूरी तरह माओवादी-मुक्त बनाना है, और कंधमाल अब राज्य का अंतिम प्रभावित जिला बचा है। आने वाले दिनों में ऐसे अभियान और तेज होंगे।
डीजीपी खुराना ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "2025 में हम देख सकते हैं कि जो बड़े इलाके पहले माओवादियों के कंट्रोल में थे, उन्हें आजाद करा लिया गया है, और अब इन इलाकों और जिलों में बहुत तेजी से डेवलपमेंट हो रहा है। कुछ इलाकों में जहां उनकी मौजूदगी अभी भी है, वहां मार्च 2026 की डेडलाइन तय की गई है। ओडिशा पुलिस इस डेडलाइन को पूरा करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है, और हमें जमीन पर बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।"