रांची, 6 फरवरी। रांची स्थित एससी-एसटी थाने में महिला अधिवक्ता और उनके सहकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में शुक्रवार को जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने एक दिन के लिए न्यायिक कार्य से स्वयं को अलग रखा। इस घटना को न्यायिक गरिमा और अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता पर गंभीर आघात बताते हुए वकीलों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
एससी-एसटी थाना प्रभारी महेश मुंडा पर महिला अधिवक्ता सविता कुजूर और उनकी सहकर्मियों के साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की, अभद्र व्यवहार करने और उनके कानूनी कार्य में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगे हैं।
इस घटना के विरोध में दोपहर करीब डेढ़ बजे बार भवन में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एसपी अग्रवाल की अध्यक्षता में अधिवक्ताओं की बैठक हुई। इसके बाद सैकड़ों अधिवक्ता सिविल कोर्ट से पैदल मार्च करते हुए एससी-एसटी थाना पहुंचे और रोषपूर्ण प्रदर्शन किया।
अधिवक्ताओं ने थाना परिसर के बाहर लगभग एक घंटे तक नारेबाजी के जरिए अपना विरोध जताया। इस दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। जिला बार एसोसिएशन की ओर से राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में एससी-एसटी थाना प्रभारी महेश मुंडा को तत्काल निलंबित करने तथा उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है। इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने प्रधान न्यायायुक्त से आग्रह किया कि कार्य बहिष्कार के कारण किसी भी प्रकरण में अधिवक्ताओं या पक्षकारों के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एसपी अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल शनिवार से अधिवक्ता पूर्व की तरह न्यायिक कार्य में शामिल होंगे, लेकिन प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले कदमों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।