नई दिल्ली, 6 फरवरी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर मणिपुर, त्रिपुरा, बिहार और झारखंड तक 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम का व्यापक प्रभाव देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुए इस संवाद ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को यह संदेश दिया कि परीक्षा जीवन का केवल एक पड़ाव है, पूरा जीवन नहीं।
दिल्ली में 'परीक्षा पे चर्चा' में शामिल कक्षा 10वीं के एक छात्र ने बताया कि यह कार्यक्रम आगामी बोर्ड परीक्षाओं के लिए बेहद उपयोगी रहा। छात्र के अनुसार, प्रधानमंत्री ने तनाव प्रबंधन को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि भले ही हर छात्र तनाव महसूस न करे, लेकिन परीक्षा, करियर और भविष्य की पढ़ाई को लेकर चिंता स्वाभाविक है, यहां तक कि माता-पिता भी बच्चों के रिजल्ट को लेकर परेशान रहते हैं।
एक अन्य छात्र (टॉपर) ने कहा कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव कई बार आत्मविश्वास को कम कर देता है। 'परीक्षा पे चर्चा' से उसे यह समझ आया कि परीक्षा जीवन का सिर्फ एक हिस्सा है। यह जरूरी जरूर है, लेकिन इससे पूरा जीवन तय नहीं होता।
छात्रों ने यह भी साझा किया कि प्रधानमंत्री ने सलाह दी कि परीक्षा को अत्यधिक तनाव के साथ नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ देना चाहिए। पढ़ाई रटने पर नहीं, विषय को समझने पर आधारित होनी चाहिए। समय प्रबंधन, सही तैयारी और संतुलित दिनचर्या पर खास जोर दिया गया।
दिल्ली के आरके पुरम विधानसभा क्षेत्र के मोती बाग स्थित स्कूल में दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद भी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि परीक्षा का डर मन से निकालना जरूरी है। आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में बच्चों की सोच, प्रयोग और उद्यमशीलता को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि वे असफलता के डर के बिना नए विचारों को आगे बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि हर बच्चा अलग है। जरूरी नहीं कि सभी आईएएस, इंजीनियर या कलाकार बनें। देश को शिक्षक, विचारक और साहित्य से जुड़े लोग भी चाहिए।
मणिपुर की राजधानी इंफाल में भी 'परीक्षा पे चर्चा' को लेकर उत्साह देखा गया। एक छात्र ने कहा कि पूरे मणिपुर में उनके स्कूल में ही यह कार्यक्रम आयोजित होना गर्व की बात है। अतिरिक्त शिक्षा निदेशक बिशेश्वर खुमुकचम ने बताया कि राज्य के 17 जिलों के सभी स्कूलों में छात्र और शिक्षक इस कार्यक्रम से जुड़े। वहीं मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह इंफाल के वांगखेई हाई स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां करीब 2,000 छात्रों ने प्रधानमंत्री के लाइव संवाद को देखा।
त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के बोर्डोवाली स्कूल में हुए नौवें संस्करण में मुख्यमंत्री माणिक साहा ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से बातचीत की। उन्होंने छात्रों को सकारात्मक सोच, समय प्रबंधन और तनाव नियंत्रण के साथ परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया।
बिहार की राजधानी पटना में भी छात्रों ने ऑनलाइन 'परीक्षा पे चर्चा' सुनी। छात्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री की बातों से उन्हें गहरी प्रेरणा मिली। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष शमायल अहमद ने कहा कि यह कार्यक्रम वर्षों से छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बना रहा है। प्रधानमंत्री के सीधे संवाद से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और परीक्षा का डर कम होता है। उन्होंने छात्रों को संतुलित पढ़ाई, समय पर सिलेबस पूरा करने, नियमित रिवीजन और अच्छे स्वास्थ्य पर ध्यान देने की सलाह दी।
झारखंड की राजधानी रांची में भी 'परीक्षा पे चर्चा' का असर दिखा। जेवीएम शामली स्कूल के प्रचार समरजीत जाना ने कहा कि परीक्षा को लेकर बच्चों के मन में डर और शंकाएं होती हैं, लेकिन इस कार्यक्रम से बच्चों को समझ आया कि परीक्षा के तनाव को उत्सव में कैसे बदला जाए और जीवन का सर्वांगीण विकास कैसे किया जाए।