फौजिया खान ने PM मोदी के भाषण पर कसा तंज: "सुनने में अच्छा, पर ज़मीनी हकीकत से कितना जुड़ा?"

राज्यसभा में पीएम मोदी के भाषण पर फौजिया खान की प्रतिक्रिया, कहा- भाषण अच्छा था, लेकिन क्या सच्चा था


नई दिल्ली, 6 फरवरी। एनसीपी (एसपी) की राज्यसभा सदस्य फौजिया खान ने केंद्र सरकार और सत्ताधारी दल पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े भाषणों के बजाय जमीनी सच्चाई पर बात होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री के राज्यसभा में दिए गए संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए फौजिया खान ने कहा कि भाषण सुनने में जरूर अच्छा था, लेकिन सवाल यह है कि वह कितना वास्तविक और सच्चा था। भाषण कितना जमीन से जुड़ा हुआ था, इस पर उन्हें गहरी शंका है। उनके मुताबिक, बातें तो बहुत बड़ी की गईं, लेकिन आम लोगों की समस्याओं का ठोस समाधान कहीं नजर नहीं आया।

मेघालय में हुए कोयला खदान ब्लास्ट पर दुख जताते हुए फौजिया खान ने कहा कि यह एक बेहद दुखद घटना है, जिसमें 18 लोगों की जान चली गई। उन्होंने अवैध खनन को इस हादसे की बड़ी वजह बताते हुए कहा कि गैरकानूनी माइनिंग पर नियंत्रण करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब हर जगह अवैध खनन हो रहा है, इसमें करोड़ों रुपए का खेल चल रहा है, और ठेकेदार एवं ऑपरेटर इससे जुड़े हैं, तो फिर इसे रोका क्यों नहीं जा रहा। उन्होंने कहा कि कब तक हमारे मजदूरों और गरीब लोगों की जानें जाती रहेंगी।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयान पर भी फौजिया खान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 'मियां' शब्द का इस्तेमाल करना और भीख मांगने वाले को लेकर पांच रुपए की बात कहना बेहद निंदनीय और शर्मनाक है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कोई कहता है कि भैंस चुरा लेंगे, कोई कहता है कि मंगलसूत्र चुरा लेंगे, और कोई कहता है कि वोटर लिस्ट से पांच लाख नाम काट दिए जाएंगे। यह सब क्या है? क्या इसी को लोकतंत्र कहते हैं? संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के लिए एक स्पष्ट आचार संहिता होनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि ऐसे नेताओं को संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए और अगर वे ऐसा नहीं करते, तो उन्हें उस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह समाज को बांटने वाली है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

फौजिया खान ने राजनीतिक दलों पर मुस्लिम नेताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व कुछ पार्टियों को पसंद नहीं है? अगर नहीं, तो इस बात को खुलकर क्यों नहीं कहा जाता? बार-बार पुराने और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और जमीयत-उलेमा हिंद से जुड़े विवाद पर भी उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में कई संगठनों और समुदायों का अहम योगदान रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
 

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