सुधा मूर्ति की राज्यसभा में अनोखी मांग: फुट रिफ्लेक्सोलॉजी को आयुष में मिले जगह, पैरों से दूर होगा तनाव और दर्द

राज्यसभा में फुट रिफ्लेक्सोलॉजी का विषय, आयुष में शामिल करने की मांग


नई दिल्ली, 6 फरवरी। राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान शुक्रवार को मनोनीत सांसद सुधा मूर्ति ने स्वास्थ्य से जुड़े एक अहम लेकिन अक्सर उपेक्षित विषय पर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने फुट रिफ्लेक्सोलॉजी (पैरों के संवेदनशील बिंदुओं के माध्यम से उपचार) को एक प्रभावी, गैर-आक्रामक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति बताते हुए इसे भारत की आयुष प्रणाली में शामिल करने की सिफारिश की।

सदन में बोलते हुए सुधा मूर्ति ने कहा कि मानव शरीर का पैर ऐसा अंग है जिसे आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसमें मौजूद संवेदनशील बिंदुओं को सही तरीके से उत्तेजित करने से दर्द कम किया जा सकता है, तनाव घटाया जा सकता है और शरीर को गहन राहत मिलती है।

उन्होंने बताया कि यह पद्धति दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों जैसे कि थाईलैंड, इंडोनेशिया, लाओस, वियतनाम आदि में व्यापक रूप से अपनाई जाती है। यहीं नहीं वहां इन देशों में इसे प्रभावी उपचार के रूप में माना जाता है। उन्होंने भारतीय पारंपरिक मालिश पद्धतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह भारत की पारंपरिक मालिश विश्वभर में प्रसिद्ध है और विदेशी नागरिक इसे अपनाने भारत आते हैं, उसी तरह दक्षिण-पूर्व एशिया में लोग फुट रिफ्लेक्सोलॉजी के लिए जाते हैं। यह उपचार गैर-आक्रामक, सुरक्षित और विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

सुधा मूर्ति ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया कि भारत सरकार, विशेष रूप से आयुष मंत्रालय, पहले से ही हर्बल, प्राकृतिक और समय-परीक्षित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने के लिए जाना जाता है। ऐसे में फुट रिफ्लेक्सोलॉजी भी एक पारंपरिक उपचार पद्धति है, जिसे वैज्ञानिक प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों और समुचित ज्ञान के साथ आयुष अस्पतालों में शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने मधुमेह (डायबिटीज) की समस्या पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत में यह एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। मधुमेह रोगियों के पैरों में संवेदनशीलता अधिक होती है और समय रहते देखभाल न होने पर गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में हर अस्पताल में फुट रिफ्लेक्सोलॉजी और फुट केयर के लिए अलग विभाग होना चाहिए, ताकि गैर-आक्रामक तरीकों से दर्द कम किया जा सके और शुरुआती स्तर पर ही समस्याओं की पहचान हो सके।

सुधा मूर्ति ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से डायबिटीज राहत संबंधी शुरुआती हस्तक्षेप संभव होगा, बीमारी के कारणों को समझने में मदद मिलेगी और मरीजों को समय पर उचित उपचार मिल सकेगा। उन्होंने इसे शरीर के एक उपेक्षित हिस्से से जुड़ा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए सरकार से आग्रह किया कि इस नई अवधारणा को अपनाकर लोगों को सही दिशा में उपचार उपलब्ध कराया जाए। अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने कहा कि पैरों की देखभाल और उपचार को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है।
 
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