नई दिल्ली, 5 फरवरी। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्पीच के दौरान विपक्ष के वॉकआउट पर कहा कि विपक्ष की दिक्कत यह है कि वे सवाल तो उठाते हैं, लेकिन सवालों के जवाब नहीं सुनना चाहते हैं।
नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि विपक्ष ने जितने सवाल उठाए, उन सवालों के जवाब सुनने की हिम्मत तो रखनी चाहिए। लोकसभा में पीएम बोलना चाहते थे, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण संभव नहीं हो पाया। राज्यसभा में जब वे बोल रहे थे तो विपक्ष वॉकआउट कर गए। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष के हर सवाल का जवाब दिया। विपक्ष की असली दिक्कत यह है कि वे सवाल तो उठाते हैं, लेकिन सवालों के जवाब सुनना नहीं चाहते। लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि आप कठिन से कठिन सवाल पूछ सकते हैं, लेकिन मर्यादित रहकर। जरूरी नहीं है कि कुर्सी पर चढ़ना पड़े। आप कड़े से कड़े विरोध को भी मर्यादित शब्दों में व्यक्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष को प्रधानमंत्री मोदी से सीखने की जरूरत है कि कैसे मर्यादित तरीके से अपने शब्दों में सवालों के जवाब दिए जा सकते हैं। अगर नेता विपक्ष भी मर्यादित होकर सवाल पूछते तो उनके सवालों के जवाब भी मिलते। सवाल यह है कि विपक्ष सवाल तो पूछते हैं, लेकिन जवाब लेने के लिए तैयार नहीं।
लोकसभा में पीएम मोदी की सीट के आसपास विपक्षी महिला सांसदों के व्यवहार पर चिराग पासवान ने कहा कि यह एक गंभीर घटना थी। उस समय मैं सदन में मौजूद था। महिलाओं का एक ग्रुप प्रधानमंत्री की कुर्सी की ओर बढ़ रहा था। मैं यह नहीं कहता कि स्थिति हिंसक हो जाती, लेकिन अगर कुछ अप्रिय या अशोभनीय हो जाता तो संसद पर एक बड़ा दाग लग जाता। आपकी वाणी में इतनी ताकत है कि आप कड़े से कड़े सवाल पूछ सकते हैं। फिर टेबल या कुर्सी पर चढ़ने की क्या जरूरत है? अपनी सीट से ही सवाल पूछ सकते हैं। आज पीएम मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष के सवालों के जवाब दिए।
चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष प्रश्नकाल नहीं चलने देगा। हंगामा करना ही जिसका मकसद है, तो यह कहीं से भी लोकतंत्र की परिभाषा को मजबूत नहीं करता।