विकसित भारत डायलॉग: युवाओं के सुझावों से बना बजट! कीर्ति, मयंक, शुभ्रा ने जताया गर्व, प्रधानमंत्री ने सुनी बात

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग: बजट में शामिल किए गए युवाओं के सुझाव, कीर्ति शुक्ला, मयंक राज और शुभ्रा चौबे ने जताया आभार


नई दिल्ली, 5 फरवरी। 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026' ने देश के युवाओं को एक ऐतिहासिक मंच प्रदान किया, जहां उनके सुझाव न सिर्फ सुने गए, बल्कि सीधे केंद्रीय बजट 2026 में शामिल हो गए। इस कार्यक्रम में देशभर से लाखों युवाओं ने भाग लिया, लेकिन कुछ चुनिंदा प्रतिभागियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपने विचार पेश करने का अवसर मिला। इनमें कानपुर की कीर्ति शुक्ला, रांची के मयंक राज और वापी (गुजरात) की शुभ्रा चौबे जैसे युवा शामिल हैं, जिनके सुझावों ने बजट में जगह बनाई।

कानपुर की कीर्ति शुक्ला ने इस अनुभव को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "मुझे बेहद खुशी है कि मेरे सुझावों को गंभीरता से लिया गया और उन्हें यूनियन बजट का हिस्सा बनाया गया। ऐसा पहली बार महसूस हुआ जब युवाओं की बात न केवल सुनी गई, बल्कि देश की तरक्की की दिशा में आगे बढ़ाई गई।"

कीर्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का मजबूत प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे मंच भविष्य में भी युवाओं को अपनी सोच और नवाचार नीतियों तक पहुंचाने का अवसर देंगे। उनकी यह उपलब्धि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

रांची से मयंक राज ने कृषि पर केंद्रित अपने विचार प्रधानमंत्री के सामने रखे। उन्होंने कहा, "मुझे बहुत गर्व हुआ जब पीएम मोदी के सामने विचार रखने का मौका मिला। लोग पीएम को सुनने आते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया, जहां वे खुद हमें सुनने आए।"

मयंक ने बताया कि उनका विषय कृषि था, जो प्रधानमंत्री को भी प्रिय है। पीएम उत्साहित थे कि युवा टेक्नोलॉजी से जुड़े विचार ला रहे हैं। उन्होंने कहा, "हमारे विचारों को बजट में जगह मिली। युवा अगर नीति-निर्माण में हिस्सा लें तो विकसित भारत का लक्ष्य निकट भविष्य में हासिल होगा। इससे ज्यादा गर्व की बात क्या हो सकती है?"

वापी, गुजरात की शुभ्रा चौबे ने 'लोकतंत्र और शासन में युवा' थीम पर विचार रखे। राजयोगेश्वर यूनिवर्सिटी में बीए इकोनॉमिक्स की द्वितीय वर्ष की छात्रा शुभ्रा ने कहा, "प्रधानमंत्री से सीधे बातचीत करना अकल्पनीय और गर्व का अनुभव था। जब इतने बड़े देश के पीएम युवाओं के विचार गंभीरता से सुनते हैं तो आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का एहसास होता है।"

उन्होंने बताया कि उनके विचारों को सिर्फ सुना नहीं गया, बल्कि पॉलिसी और बजट में शामिल किया गया। वित्त मंत्री द्वारा इसे युवा-संचालित बजट बताए जाने पर उन्हें गर्व हुआ। शुभ्रा ने कहा, "भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। आज युवा सिर्फ चर्चा में हिस्सा लेने वाले नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के भागीदार हैं। महिला सशक्तिकरण, ऑरेंज इकोनॉमी, स्टार्टअप, कौशल और आत्मनिर्भरता पर बजट ने युवाओं की आकांक्षाओं को जगह दी है।"

यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के युवा शक्ति पर अटूट विश्वास का प्रतीक है। तीनों प्रतिभागियों ने एकमत से कहा कि युवाओं के विचारों का बजट में शामिल होना दर्शाता है कि सरकार अब युवाओं को प्रतीकात्मक रूप से नहीं, बल्कि वास्तविक नीति-निर्माण का हिस्सा मान रही है। कीर्ति, मयंक और शुभ्रा ने देश के युवाओं से अपील की कि वे सोचें, विचार दें और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें।

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग ने साबित किया कि युवा अब सपने देखने वाले नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं। बजट में युवा-संबंधित पहलों का विस्तार, जैसे स्टार्टअप फंडिंग, कौशल विकास, डिजिटल इनोवेशन और महिला उद्यमिता पर फोकस, इसी का प्रमाण है। यह पहल न केवल युवाओं को प्रेरित कर रही है, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में उनकी भूमिका को मजबूत कर रही है।
 
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