DRDO और US DIU की ऐतिहासिक जुगलबंदी: भारत-अमेरिका मिलकर रक्षा तकनीक में रचेंगे नवाचार का नया अध्याय

अमेरिका की डिफेंस इनोवेशन यूनिट और डीआरडीओ एक साथ कर सकते हैं काम


नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस) नई दिल्ली में भारत-अमेरिका संयुक्त तकनीकी समूह की 24वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मकसद रक्षा विज्ञान और नई तकनीकों के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को और आगे बढ़ाना था।

बदलती सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस दौरान यह भी तय हुआ कि विश्वविद्यालयों, रक्षा प्रयोगशालाओं और उद्योगों को मिलकर रिसर्च और डेवलपमेंट में ज्यादा शामिल किया जाएगा। इसके अलावा डीआरडीओ और अमेरिका की डिफेंस इनोवेशन यूनिट के बीच नई तकनीकों पर साथ काम करने की संभावनाओं पर भी बात हुई।

बैठक के अंत में एक परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर भी किए गए। नई दिल्ली में यह बैठक डीआरडीओ के मुख्यालय में आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता डीआरडीओ की वरिष्ठ अधिकारी डॉ. चंद्रिका कौशिक और अमेरिका के रक्षा विभाग के माइकल फ्रांसिस डॉड ने मिलकर की।

यह बैठक उस समझौते के तहत हुई, जिस पर अक्टूबर 2025 में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिका के युद्ध सचिव ने हस्ताक्षर किए थे। भारत और अमेरिका ने रक्षा साझेदारी के इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ से इस मुलाकात के दौरान 10 वर्षीय ‘फ्रेमवर्क फॉर द यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप’ पर हस्ताक्षर किए थे।

यह दोनों देशों के बीच 10 वर्षों के लिए “यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क” है। दोनों देशों के बीच हुए इस करार को भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग में एक नया मील का पत्थर माना जा रहा है। यह भारत व अमेरिका के रक्षा सहयोग में एक नए युग की शुरुआत करेगा। रक्षा मंत्रालय का कहना था कि यह फ्रेमवर्क भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम को नीतिगत दिशा प्रदान करेगा।

अब डीआरडीओ मुख्यालय में हुई बैठक में दोनों देशों ने अब तक रक्षा तकनीक में हुए सहयोग की समीक्षा की और यह भी चर्चा की कि आगे किन नई और अहम तकनीकों पर मिलकर काम किया जा सकता है। इस बैठक में अमेरिका और भारत के रक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।

भारत की ओर से तीनों सेनाओं, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद से जुड़े अधिकारी मौजूद थे। यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
 

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