राहुल गांधी पर बरसे संजय निरुपम: अबोध बच्चे जैसा व्यवहार क्यों? राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ न करें

राहुल गांधी अबोध बच्चे की तरह व्यवहार करते हैं: संजय निरुपम


मुंबई, 5 फरवरी। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वे अबोध बच्चे की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी व्यवहार कर रहे हैं, उनमें बहुत कम समझदारी दिखती है। विपक्ष के नेता का पद बहुत गंभीर होता है और पूरा देश उस पद पर बैठे व्यक्ति पर बहुत ध्यान देता है, क्योंकि सरकार के कामकाज पर उनकी टिप्पणियों और आलोचनाओं का बहुत महत्व होता है। विपक्ष का नेता विपक्ष की आवाज और उसकी सोच का प्रतिनिधित्व करता है। राहुल गांधी पिछले चार-पांच दिनों में देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं। जिस किताब को प्रकाशित नहीं किया गया है, उसे कोट कर रहे हैं।

निरुपम ने कहा कि संसद परिसर में राहुल गांधी ने केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को 'गद्दार' कहा है। ऐसे में निष्कर्ष निकलता है कि क्या राहुल गांधी वाकई नेता प्रतिपक्ष के पद के लायक हैं? सही मायनों में वे अबोध बच्चे की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जो पूरे देश के लिए खतरनाक लगता है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं को अंदर झांकना चाहिए। वे न केवल कांग्रेस का, बल्कि देश का भी नुकसान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब लोकसभा की कार्यवाही बाधित होती है, तो राज्यसभा अपना काम जारी रखती है और इसका उल्टा भी होता है। राज्यसभा की कार्यवाही जारी नहीं रह पाती, तो इसका लोकसभा पर कोई असर नहीं पड़ता। दोनों सदनों का कामकाज स्वतंत्र है। हालांकि, जिस तरह से मल्लिकार्जुन खड़गे ने गांधी परिवार के प्रति वफादारी दिखाते हुए लोकसभा की गतिविधियों के आधार पर राज्यसभा की कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश की, वह साफ तौर पर संसदीय प्रक्रियाओं और तय नियमों के खिलाफ है।

'घूसखोर पंडित' विवाद पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि फिल्म का पूरा टाइटल थोड़ा चौंकाने वाला है और गुस्सा भी दिला सकता है। भ्रष्टाचार गंभीर मुद्दा है, खासकर पुलिस या सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आते रहते हैं, इसलिए इस विषय पर फिल्में बननी ही चाहिए। हालांकि, ऐसी फिल्में बनाते समय किसी खास जाति, समुदाय या धर्म को निशाना बनाने से मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकता है और यह उस समूह को बदनाम करने की कोशिश ज्यादा लगती है। इस पूरे मामले में यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
 

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