संयोग से मिला था फाइनल खेलने का मौका, किस्मत ने दोबारा श्रीसंत को बनाया चैंपियन

संयोग से मिला था फाइनल खेलने का मौका, किस्मत ने दोबारा श्रीसंत को बनाया चैंपियन


नई दिल्ली, 5 फरवरी। हर हिंदुस्तानी की धड़कनें तेज थीं, क्योंकि दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतने का मौका था, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मुकाबले से पहले वह कुछ घट चुका था। आशीष नेहरा, जो पूरी सीरीज में भारत के लिए विकेट बंटोरने में लगे हुए थे, फाइनल से पहले चोट के कारण अचानक से मैदान से बाहर जा चुके थे। टीम इंडिया के सामने बॉलिंग ऑप्शन चुनने की चुनौती थी, तब सामने उस खिलाड़ी को लाया गया, जो 42 दिन से खुद क्रिकेट के मैदान से बाहर था, मगर जब मैदान पर आया और फाइनल मुकाबला खेला गया तो भारत दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनकर आया था।

यह कहानी है अक्सर विवादों में रहे बॉलर श्रीसंत की। 6 फरवरी 1983 को केरल में जन्मे श्रीसंत ने क्रिकेट में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 6 फरवरी 1983 को जन्मे केरल के इस तेज गेंदबाज को बचपन में लेग स्पिन का शौक था, लेकिन भाई की सलाह पर मीडियम पेस अपनाई। 2000 में पेस फाउंडेशन में चयन और 2002 में रणजी पदार्पण के बाद वे भारत के लिए खेलने वाले केरल के पहले टी-20 खिलाड़ी बने।

वे ऐसे खिलाड़ी हैं जो दो बार वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा रहे। जहां 2007 के वर्ल्ड कप मैच में उन्हें अक्सर फाइनल मुकाबले में पकड़े गए कैच के लिए याद किया जाता है, तो वहीं 2011 का फाइनल मुकाबला उनके जीवन का एक ऐसा किस्सा है जब चुनौती उनके सामने सबसे अधिक थी।

कारण यह था कि श्रीसंत पूरी सीरीज में अधिकतर समय मैदान से बाहर रहे। बांग्लादेश से बुरी तरह पिटने के बाद श्रीसंत का वर्ल्ड कप लगभग खत्म हो गया था, लेकिन उन्हें सीधे फाइनल मुकाबला खेलने को मिला। इसके पीछे कारण था चोटिल होने के बाद आशीष नेहरा का मैदान से बाहर होना। 2011 के वर्ल्ड कप को लेकर एक इंटरव्यू में श्रीसंत ने बताया, "मैं 42 दिन मैच नहीं खेला। मुझे सीधे वर्ल्ड कप फाइनल खेलने को मिला।" उन्होंने बताया कि सचिन तेंदुलकर ने निजी तौर पर मुझे अपने पास बुलाया और बॉलिंग कराई। इसके बाद शायद महेंद्र सिंह धोनी को बोला था कि श्रीसंत को खिलाया जा सकता है।

इस फाइनल मुकाबले का एक किस्सा वीरेंद्र सहवाग ने एक इंटरव्यू में बताया कि श्रीसंत अपने स्पेल के कुछ ओवर डालने के बाद ही घबरा उठे थे और कहने लगे कि सांस नहीं आ रही है। वे मैदान से चले गए। इस किस्से को पूरा करते हुए श्रीसंत ने खुद कहा कि उन्हें पता ही नहीं था कि वे फाइनल मुकाबले में खेलेंगे, इसीलिए वे सुबह के समय जिम चले गए। बाद में हरभजन सिंह का फोन आया और उन्होंने बताया कि वे मैच में खेल सकते हैं, इसलिए तैयार रहना।

खुद श्रीसंत को भरोसा नहीं था, क्योंकि फाइनल मुकाबले से पहले कुछ मैच में उन्हें आराम दिया गया था, लेकिन यह संयोग था कि उन्हें फाइनल मुकाबले में खेलने का मौका मिला।

सहवाग ने बताया कि उन्हें मुश्किल से यह कहकर बॉलिंग के लिए लाया गया कि अगर बॉलिंग नहीं की तो आज से क्रिकेट नहीं खेलेगा। तब जाकर श्रीसंत ने बॉलिंग की। बाद में श्रीसंत ने बताया कि जब वे पवेलियन की तरफ चले गए थे तो सचिन तेंदुलकर ड्रिंक ब्रेक में पास आकर बोले कि मैदान पर लौटकर आओ और बॉलिंग करो। सचिन तेंदुलकर ने उन्हें बताया था कि मैदान पर महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें बुलाया है। इस पर श्रीसंत ने कहा कि धोनी ने बुलाया तो जाएंगे। फिर उन्होंने मुकाबले में अपने ओवर डाले।

श्रीसंत भले ही दो वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा बने, लेकिन विवादों के कारण उनका क्रिकेट करियर ज्यादा लंबा नहीं रहा। खासकर विवादों के कारण उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए और क्रिकेट से काफी समय दूर रहना पड़ा था। 2013 के स्पॉट-फिक्सिंग आरोपों ने उनके करियर पर आजीवन प्रतिबंध (बाद में कम हुआ) लगा दिया था, जिससे वे टूट गए थे। कानूनी लड़ाई के बाद वे आरोपों से बरी हुए थे। 2021 में क्रिकेट में वापसी के बाद वे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी के लिए केरल टीम का हिस्सा रहे। 9 मार्च 2022 को श्रीसंत ने घरेलू क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की।
 

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