राहुल के 'गद्दार' बयान पर सियासी बवाल, भाजपा बोली- सिख समुदाय का अपमान, कांग्रेस ने धर्म घसीटने की आदत पर घेरा

राहुल-बिट्टू विवाद पर भाजपा बोली- सिख समुदाय का किया अपमान, कांग्रेस ने कहा धर्म को घसीटने की आदत


नई दिल्ली, 5 फरवरी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को 'गद्दार' कहे जाने के बयान को लेकर राजनीतिक घमासान तेज है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर पारदर्शिता के सवाल खड़े किए हैं।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य गुलाम अली खटाना ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां कानून का राज है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, किसी भी पॉलिटिकल जमात में जा सकता है। जिस समुदाय ने देश के लिए जान कुर्बान की हो, ऐसे पूरे समुदाय की राहुल गांधी ने बेइज्जती की है। नेता प्रतिपक्ष को ऐसे अल्फाज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

उन्होंने चुनाव आयोग को एक स्वायत्त और संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि वोट देने का अधिकार केवल देश के नागरिकों को ही है और अवैध प्रवासियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खटाना ने दोहराया कि लोकतंत्र में संस्थाओं की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए।

कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने राहुल गांधी-रवनीत सिंह बिट्टू विवाद पर भाजपा को घेरते हुए अलग नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। बंसल के अनुसार, रवनीत बिट्टू सरदार बेअंत सिंह के पोते हैं और शुरू में उनकी पहचान सिर्फ पारिवारिक संबंधों तक सीमित थी।

उन्होंने कहा कि परिवार में कई लोग राजनीति और सामाजिक सेवा से जुड़े रहे, लेकिन बिट्टू ने खुद ज्यादा काम नहीं किया था। ऐसे में राहुल गांधी युवा और संभावनाशील चेहरों को आगे लाने की कोशिश कर रहे थे और इसी संदर्भ में बिट्टू को यूथ कांग्रेस में मौका मिला।

बंसल ने कहा कि भाजपा को हर मुद्दे को धर्म से जोड़ने की आदत हो गई है। आज तक भाजपा ने सिख समुदाय के लिए क्या किया है। सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा अपनी मूल विचारधारा और सिद्धांतों के विपरीत काम कर रही है।

इसके अलावा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी कांग्रेस नेता ने गंभीर सवाल खड़े किए। पवन कुमार बंसल ने कहा कि इस पूरे मामले में अब तक पारदर्शिता की कमी है। आम तौर पर दो देशों के बीच समझौते पहले लिखित और औपचारिक रूप में तय होते हैं, उसके बाद संबंधित मंत्री, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति दोनों देशों की ओर से इसकी घोषणा करते हैं। इस मामले में स्थिति अलग है। अमेरिका के नए राजदूत भारत आकर इसकी घोषणा कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही।

बंसल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए। बंसल ने कहा कि डोभाल का काम सुरक्षा मामलों तक सीमित है और उन्हें व्यापार जैसे विषयों पर बोलने का अधिकार नहीं है। व्यापार और अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर बोलने की जिम्मेदारी केवल उन मंत्रियों की होती है, जिन्होंने संसद में शपथ ली होती है।
 
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