2035 तक भारत में 2.7 अरब वर्ग फुट शैक्षणिक स्पेस जुड़ेगा, करीब 100 अरब डॉलर के निवेश की संभावना

2035 तक भारत में 2.7 अरब वर्ग फुट शैक्षणिक स्पेस जुड़ेगा, करीब 100 अरब डॉलर के निवेश की संभावना


नई दिल्ली, 5 फरवरी। छात्रों की तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए वर्ष 2035 तक भारत में करीब 30,000 एकड़ नई कैंपस भूमि और लगभग 2.7 अरब वर्ग फुट शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर जुड़ने की संभावना है। इससे अगले एक दशक में भारत दुनिया के सबसे बड़े इंस्टीट्यूशनल रियल एस्टेट अवसरों में से एक बन सकता है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

एनारॉक कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत 2035 तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगभग 2.5 करोड़ अतिरिक्त सीटों की जरूरत होगी। इसके लिए केवल शैक्षणिक परिसरों के निर्माण में ही करीब 100 अरब डॉलर का निवेश आवश्यक होगा, जिसमें भूमि अधिग्रहण और छात्र आवास से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “जनसांख्यिकीय गति, बढ़ते नामांकन, शिक्षा का वैश्वीकरण और ऐतिहासिक नियामकीय सुधारों के बल पर यह विस्तार वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षा के सबसे बड़े निर्माण बाजारों में से एक बन सकता है।”

रियल एस्टेट सेवा कंपनी ने बताया कि भारत में उच्च शिक्षा में नामांकन 2010-11 में 2.7 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 4.5 करोड़ तक पहुंच गया है। इसी अवधि में विश्वविद्यालयों की संख्या 2015 में 760 से बढ़कर 2025 में 1,338 हो गई, जबकि कुल उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या 51,534 से बढ़कर 70,018 हो चुकी है।

एनारॉक कैपिटल के सीईओ शोभित अग्रवाल ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026 में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप के निर्माण के समर्थन का प्रावधान शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर में मौजूद अंतर को सरकार द्वारा स्वीकार किए जाने का संकेत है।”

एनारॉक कैपिटल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी) आशीष अग्रवाल ने बताया कि एफएचईआई नियमों के बाद अब वैश्विक रैंकिंग में टॉप-500 में शामिल विदेशी उच्च शिक्षा संस्थान भारतीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध हुए बिना सीधे भारत में अपने कैंपस स्थापित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पहले से खुल चुके तीन वैश्विक विश्वविद्यालय कैंपस के अलावा 13 अन्य विदेशी संस्थानों ने भारत में अपने कैंपस खोलने की घोषणा की है। इनमें लैंकेस्टर (यूके), लिवरपूल (यूके), इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (अमेरिका) और इंस्टीट्यूटो यूरोपियो दी डिज़ाइन (इटली) जैसे संस्थान शामिल हैं, जो भारत के शिक्षा बाजार में अंतरराष्ट्रीय भरोसे को दर्शाते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश ने उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए स्टांप ड्यूटी में छूट और पूंजीगत सब्सिडी लागू की है। वहीं गुजरात के गिफ्ट सिटी में साझा शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एक विशेष अंतरराष्ट्रीय कैंपस फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।

महाराष्ट्र ने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास 250 एकड़ में प्रस्तावित ‘एजु-सिटी’ को अपनी रणनीति का केंद्र बनाया है, जहां पांच विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों से प्रतिबद्धता हासिल की जा चुकी है।
 
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