'अबोध बालक' बयान पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'ज्ञान की कोई सीमा नहीं, अज्ञान की कोई उम्र नहीं होती'

'अबोध बालक' विवाद पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'ज्ञान की कोई सीमा नहीं, अज्ञान की कोई उम्र नहीं होती'


नई दिल्ली, 5 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने नेता सदन जेपी नड्डा के उस बयान पर अपनी बात रखी, जिसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बिना नाम लिए सदन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को कहा कि 'अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए।'

अब सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने यदि 'अबोध' शब्द का प्रयोग किया है तो यह 'बोध' शब्द में 'अ' प्रत्यय लगाकर बना है। अर्थात जिसे ज्ञान ही न हो। वैसे ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है और अज्ञान की कोई उम्र नहीं होती है। यह बात नेता प्रतिपक्ष के आचरण से प्रमाणित होती है।

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आगे कहा कि अबोध होने का प्रमाण ये है कि जिसे ये न पता हो कि फ्लोर ऑफ द हाउस में सब्सटेंशियल एविडेंस मीडिया रिपोर्ट्स नहीं होती, सदन के पटल पर मीडिया रिपोर्ट प्रामाणिक तथ्य नहीं हैं। जिसे ये न पता हो कि सेना अध्यक्ष-प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के बीच का कम्युनिकेशन राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और गोपनीय होता है, अतः यह ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 में आता है, वो पब्लिक डोमेन में नहीं हो सकता, उस पर सार्वजनिक चर्चा नहीं हो सकती। जो यह न जानता हो, वो अबोध है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अगर किताब की बात है तो मैं कोट करता हूं और इसे सिद्ध कर सकता हूं। 19 नवंबर 1962 में जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को लिखा 'डिक्लासिफाइड बाय जेके लाइब्रेरी इन 2010' कि हमें बी2 बॉम्बर चाहिए, स्क्वाड्रन चाहिए उसके लिए पायलट, जमीन पर तकनीक स्टाफ और रडार पर लोग भी आपके (यानी अमेरिकी) रहेंगे, यानी एक प्रकार से भारत की वायुसेना की कमान अमेरिकी ले लें। उस समय अमेरिका में भारत के राजदूत बीके नेहरू, जो जवाहरलाल नेहरू जी के भतीजे भी थे। उन्होंने अपनी किताब 'नाइस गाइज फिनिश सेकंड' में लिखा कि मैं जब वो पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार को देने जा रहा था तो उन्हें इतनी शर्म महसूस हो रही थी कि वो अपने को रोने से नहीं रोक पाए।

उन्होंने लिखा कि चाचाजी के शर्मनाक सरेंडर की कहानी खुद उनके सगे भतीजे की जुबानी।

राज्यसभा में गुरुवार को जेपी नड्डा ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को संबोधित करते हुए सदन में कहा कि 'अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए।' इससे मल्लिकार्जुन खड़गे भड़क गए और उन्होंने सदन में जेपी नड्डा की बात का खंडन किया।
 

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