तमिलनाडु चुनाव: डीएमके ने DMDK को दी 7 सीटें, लेकिन DMDK ने ठुकराकर मांगीं 14; जारी है खींचतान

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: डीएमके और डीएमडीके के बीच सीट शेयरिंग पर बातचीत जारी


चेन्नई, 5 फरवरी। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों की शुरुआती तैयारियों में देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) को एक अहम सहयोगी के तौर पर पाया है। दोनों पार्टियां सीट-शेयरिंग और लंबे समय के राजनीतिक सहयोग को लेकर बातचीत कर रही हैं।

डीएमके, जो चुनाव से काफी पहले ही अपनी चुनावी गणित को मजबूत करना चाहती है, उसने कथित तौर पर डीएमडीके को सात विधानसभा सीटों के साथ-साथ एक राज्यसभा सीट की पेशकश की है, जो अप्रैल में खाली होने वाली है।

इस प्रस्ताव को सत्ताधारी पार्टी की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद अपने गठबंधन के आधार को मजबूत करना और अपने लिए ज्यादा सीटों पर कब्जा बनाए रखना है।

हालांकि, डीएमडीके ने कथित तौर पर ज्यादा सीटों की मांग की है। पार्टी ने 14 विधानसभा सीटों तक की मांग की है। साथ ही, पार्टी ने एनडीए के साथ समानांतर बातचीत करके अपने विकल्प खुले रखे हैं, जिससे बातचीत में सस्पेंस का माहौल बन गया है। इसके बावजूद, डीएमके नेताओं को उम्मीद है कि जल्द ही कोई समझौता हो जाएगा।

सत्ताधारी पार्टी गठबंधन की व्यवस्था को जल्दी से अंतिम रूप देना चाहती है ताकि वह अपनी संगठनात्मक तैयारियों के साथ आगे बढ़ सके। उसने अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे को औपचारिक रूप से अंतिम रूप देने से पहले चुनावी सूचियों का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पूरा करने की योजना बनाई है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि डीएमके का इरादा 234 विधानसभा सीटों में से कम से कम 170 सीटों पर चुनाव लड़ने का है, जो 2021 के चुनावों में लड़ी गई 173 सीटों से थोड़ी ही कम हैं। यह मौजूदा सत्ता को बनाए रखने में उसके आत्मविश्वास को दिखाता है।

जहां डीएमडीके के साथ बातचीत मुख्य केंद्र में है। वहीं, डीएमके ने अपने गठबंधन को बड़ा करने के लिए चुपचाप दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर भी विचार किया है।

इनमें अन्नाद्रमुक से निकाले गए नेता ओ पन्नीरसेल्वम भी शामिल हैं। शुरुआती बातचीत में यह देखा गया कि क्या वह कोई अलग पार्टी बना सकते हैं या सीधे डीएमके के साथ गठबंधन कर सकते हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर के आकलन से पता चला कि वोटों को ट्रांसफर करने की उनकी क्षमता सीमित हो सकती है, जिससे ऐसे किसी समझौते की जरूरत कम हो गई है।

फिर भी, बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं। कई बातचीत चल रही हैं, डीएमके नेतृत्व प्रतीकात्मक साझेदारियों के बजाय एक व्यावहारिक और संख्यात्मक रूप से मजबूत गठबंधन बनाने पर ध्यान केंद्रित करता दिख रहा है।

आने वाले दिनों में यह तय होने की उम्मीद है कि डीएमडीके सत्ताधारी मोर्चे का एक मुख्य स्तंभ बनेगा या कोई अलग राजनीतिक रास्ता अपनाएगा।
 

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