दक्षिण सूडान में WFP के मानवीय खाद्य काफिले पर हमला और लूटपाट; असुरक्षा के कारण बलिएट में अभियान निलंबित

दक्षिण सूडान: काफिले पर हमले के बाद डब्ल्यूएफपी ने बलिएट काउंटी में अभियान रोका


जुबा, 4 फरवरी। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने पिछले सप्ताह अपने नदी काफिले पर हुए हमले के बाद दक्षिण सूडान के बलिएट काउंटी में अपनी सभी गतिविधियां निलंबित कर दी हैं।

डब्ल्यूएफपी ने बुधवार को बताया कि 12 नावों वाला उसका काफिला, जो 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आवश्यक खाद्य सहायता लेकर जा रहा था, 30 जनवरी से 1 फरवरी के बीच कई बार हथियारबंद युवकों के हमले का शिकार हुआ। इस काफिले में साझेदार एजेंसियों के लिए ले जाए जा रहे गैर-खाद्य सामग्री भी शामिल थीं।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, बलिएट के विभिन्न इलाकों में रात के समय स्थानीय समुदाय के कुछ लोगों ने इन सामग्रियों को लूट लिया। डब्ल्यूएफपी ने कहा कि सुरक्षित मानवीय आवाजाही को लेकर प्रशासन से सुरक्षा आश्वासन और गारंटी मिलने के बावजूद यह लूटपाट रात में हुई और काउंटी प्रशासन की ओर से कोई सुरक्षा हस्तक्षेप नहीं किया गया।

जुबा से जारी बयान में डब्ल्यूएफपी ने कहा कि इस घटना के चलते एजेंसी को बलिएट काउंटी में अपनी सभी गतिविधियां तब तक के लिए रोकनी पड़ी हैं, जब तक उसके कर्मचारियों, साझेदारों और ठेकेदारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।

संयुक्त राष्ट्र की इस खाद्य एजेंसी ने सरकार से लूटी गई राहत सामग्री की तत्काल बरामदगी के लिए कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि मानवीय कर्मियों पर हमले किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। डब्ल्यूएफपी ने कहा, “हम संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे मानवीय कर्मियों की अहम भूमिका का सम्मान करें और सहायता पहुंचाने के लिए जरूरी सुविधाओं व संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।”

डब्ल्यूएफपी ने यह भी बताया कि वह जोंगलेई राज्य में हालिया घटनाओं को लेकर बेहद चिंतित है, जहां सरकारी बलों और विपक्षी समूहों के बीच सशस्त्र संघर्ष के कारण महत्वपूर्ण मानवीय ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। दिसंबर 2025 से दक्षिण सूडान पीपुल्स डिफेंस फोर्स और विपक्षी सूडान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी-इन-ऑपोजिशन के बीच जारी लड़ाई के चलते अकोबो, आयोड, न्यिरोल और उरोर काउंटियों में गोदामों और स्वास्थ्य केंद्रों सहित कई जरूरी ढांचे नष्ट हो चुके हैं।

डब्ल्यूएफपी ने चेतावनी दी कि पहुंच में बाधाएं और मानवीय काफिलों पर खुलेआम हो रहे हमले उसकी उस क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं, जिसके जरिए वह 42 लाख से अधिक सबसे जरूरतमंद महिलाओं, पुरुषों और बच्चों तक मदद पहुंचाता है।

एजेंसी ने यह भी कहा कि जोंगलेई में लगातार बनी असुरक्षा के चलते उसे बरसात के मौसम से पहले 12,000 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री की अग्रिम तैनाती की अपनी योजना को भी रोकना पड़ा है।
 

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