तिरुवनंतपुरम, 4 फरवरी। कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के 63वें जन्मदिन के अवसर पर बुधवार को पार्टी के केरल मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
केक काटने के इस समारोह में शीर्ष केंद्रीय और राज्य स्तर के कांग्रेस नेता शामिल हुए। दिलचस्प बात यह रही कि वेणुगोपाल स्वयं इस कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।
उनकी अनुपस्थिति के बावजूद, राज्य कांग्रेस के लगभग सभी प्रमुख नेता और कई बाहरी वरिष्ठ नेता कार्यक्रम में शामिल हुए, जिसने न केवल पार्टी के भीतर वेणुगोपाल के प्रभाव को रेखांकित किया, बल्कि सार्वजनिक जीवन में उनके करीब पांच दशकों के राजनीतिक सफर का भी जश्न मनाया।
कार्यक्रम में कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री, राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ, विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशान, कांग्रेस कार्यकारी समिति के सदस्य रमेश चेन्निथला, कांग्रेस महासचिव दीपा दासमुंशी, स्क्रीनिंग कमेटी के वरिष्ठ सदस्य और राज्य इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष मौजूद रहे। इन वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक औपचारिक जन्मदिन समारोह से आगे बढ़ाकर एक सशक्त राजनीतिक संदेश में बदल दिया।
केसी वेणुगोपाल का राजनीतिक उदय न तो अचानक रहा है और न ही संयोगवश। छात्र राजनीति से निकले वेणुगोपाल ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत केरल छात्र संघ से की और बाद में केएसयू तथा भारतीय युवा कांग्रेस, दोनों का राज्य स्तर पर नेतृत्व किया।
उनकी संगठनात्मक क्षमता का प्रतिफल तब मिला जब उन्होंने 1996 में अलाप्पुझा से केरल विधानसभा में प्रवेश किया और 2001 तथा 2006 में लगातार सीट बरकरार रखी। वर्ष 2004 से 2006 के बीच ओमन चांडी सरकार में देवस्वोम और पर्यटन मंत्री के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने अपनी प्रशासनिक पहचान भी मजबूत की।
राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रवेश 2009 में अलाप्पुझा लोकसभा सीट जीतने के साथ हुआ। इसके बाद उन्होंने 2011 से 2014 तक दूसरी यूपीए सरकार में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
हालांकि 2019 के आम चुनाव में वे संसद से बाहर रहे और कांग्रेस को अलाप्पुझा सीट सीपीआई(एम) से गंवानी पड़ी-लेकिन इसके बावजूद पार्टी संगठन में उनका कद और अधिक मजबूत हुआ। वर्ष 2020 में राजस्थान से राज्यसभा के लिए चुने जाने और फिर संगठन महासचिव बनाए जाने के बाद वे कांग्रेस के पुनरुद्धार प्रयासों के केंद्र में आ गए।2024 में संसद में उनकी वापसी और अलाप्पुझा सीट से तीसरी बार जीत ने उनके राजनीतिक करियर के एक पूर्ण चक्र को पूरा किया।