पाकिस्तान: एंटी-ड्रग अभियान का काला सच! फर्जी मामलों में फंसाकर ईसाई अल्पसंख्यकों को पुलिस बना रही निशाना

पाकिस्तान: फर्जी ड्रग मामलों के जरिए ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय को बनाया जा रहा निशाना


इस्लामाबाद, 4 फरवरी। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में चलाए जा रहे एंटी-ड्रग अभियान के तहत ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने का मामला सामने आया है।

फैसलाबाद में ईसाई समुदाय के नेताओं ने पुलिस पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई और समुदाय को ड्रग्स से जोड़ने का आरोप लगाया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो महीनों से ईसाई समुदाय के लोगों पर छापेमारी की जा रही है और उनके खिलाफ कथित रूप से फर्जी नारकोटिक्स केस दर्ज किए जा रहे हैं।

फैसलाबाद प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए माइनॉरिटी राइट्स मूवमेंट के प्रमुख लाला रॉबिन डेनियल और अन्य ईसाई नेताओं ने कहा कि समुदाय नशे के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करता है, लेकिन ईसाइयों को ड्रग गतिविधियों का केंद्र बताने वाले “टार्गेटेड नैरेटिव” का वे विरोध करते हैं। यह जानकारी मानवाधिकार मामलों पर रिपोर्ट करने वाले प्लेटफॉर्म ने दी।

नेताओं का आरोप है कि हेरोइन, चरस और ‘आइस’ जैसे नशीले पदार्थों को बेबुनियाद पुलिस मामलों और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए ईसाई समुदाय से जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की मुहिम से पूरे समुदाय को अपराधी के रूप में पेश करने का खतरा है और सामाजिक पूर्वाग्रह और गहरा सकता है। उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप कर कानून-व्यवस्था और खुफिया रिपोर्टिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि कानून के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों को शराब बेचने और खरीदने की अनुमति है, ऐसे में इसे ‘ड्रग’ बताकर लोगों को हिरासत में लेना कानून का उल्लंघन है। नेताओं ने कहा, “अगर पुलिस या राज्य का कोई भी अंग शराब को ड्रग घोषित कर उसके खिलाफ प्रचार करता है, तो यह कानून का सीधा उल्लंघन होगा।”

लाला रॉबिन डेनियल ने आरोप लगाया कि ईसाई समुदाय के लोगों पर नारकोटिक्स कानून की धाराओं, खासकर धारा 9(सी) के तहत फर्जी और भेदभावपूर्ण मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे समुदाय को फर्जी ड्रग मामलों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।” उन्होंने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के लिए “बेहद खतरनाक” स्थिति करार दिया।

डेनियल ने दावा किया कि शराब के लिए वैध लाइसेंस होने के बावजूद ईसाई समुदाय के लोगों पर हेरोइन, आइस और चरस जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “फर्जी मामलों का यह अभियान पूरे ईसाई समुदाय को अपराधी के रूप में बदनाम कर सकता है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ड्रग मामलों के आंकड़े बढ़ाने के लिए ईसाई समुदाय के खिलाफ झूठे केस दर्ज कर रही है। डेनियल के मुताबिक, “हमारे समुदाय के कई लोग इस समय फर्जी नारकोटिक्स मामलों का सामना कर रहे हैं।”
 

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