नई दिल्ली, 4 फरवरी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में जिम और फिटनेस सेंटर की आड़ में युवतियों के शोषण और कथित जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोपों पर संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मिर्जापुर में एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जो जिम और फिटनेस सेंटर के माध्यम से युवतियों को निशाना बनाता था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में 50 से अधिक महिलाओं को कथित रूप से फंसाया गया और एक पुलिसकर्मी की संलिप्तता भी सामने आई है। इससे सरकारी अधिकारों के दुरुपयोग और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आयोग के अनुसार, पुलिस अधिकारी की कथित भूमिका से न सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और आम जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंची है। शिकायतकर्ता ने मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच, पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा जिम और फिटनेस सेंटरों के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पीठ के अध्यक्ष सदस्य प्रियंक कानूनगो ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से अपने-अपने क्षेत्रों में जिम और फिटनेस सेंटरों के लिए लागू नियमों, पंजीकरण प्रक्रिया और मानकों पर रिपोर्ट मांगी है।
इसके अलावा, युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय और खेल प्राधिकरण भारत से भी जिम और फिटनेस सेंटरों से संबंधित मौजूदा दिशा-निर्देशों और लाइसेंस व्यवस्था पर जानकारी देने को कहा गया है।
आयोग ने मिर्जापुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी निर्देश दिया है कि वे मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपें। सभी संबंधित अधिकारियों को आयोग को कार्रवाई रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।