भोपाल, 4 फरवरी। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चार दशक पहले हुए गैस हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं। गैस पीड़ितों के बीच काम करने वालों का दावा है कि प्रभावित क्षेत्र के लोगों में अन्य स्थानों के लोगों के मुकाबले कैंसर जैसी बीमारियों के पीड़ितों का आंकड़ा 13 गुना है।
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर गैस पीड़ितों के उपचार के लिए संचालित संभावना ट्रस्ट क्लीनिक के सदस्यों ने बताया कि 1984 की यूनियन कार्बाइड हादसे से प्रभावित आबादी में कैंसर की दर, अपीड़ित आबादी की तुलना में लगभग 13 गुना ज्यादा है।
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि गैस पीड़ित महिलाओं की अपेक्षा गैस पीड़ित पुरुषों में कैंसर की दर ज्यादा है। क्लीनिक की सामुदायिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण यूनिट के सदस्य राधे लाल नापित ने कहा, हमने 21276 गैस पीड़ितों और 25528 अपीड़ित व्यक्तियों के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानकारी इकट्ठा की है, जिनकी आय और शिक्षा समान है। कैंसर का आंकड़ा उन सभी लोगों का है जिन्हें 1992 और 2012 के बीच कैंसर का पता चला था।
जानकारी इकट्ठा करने के लिए घर-घर जाने वाली टीम की सदस्य फरहत जहां ने कहा, हमारा आंकड़ा यह दिखाता है कि गैस पीड़ित आबादी में कैंसर की दर प्रति 100,000 पर 1569.84 है, वहीं अपीड़ित आबादी में यह प्रति 100,000 पर 117.52 है। गैस पीड़ित पुरुषों में कैंसर की दर 14.92 गुना ज्यादा है, जबकि गैस पीड़ित महिलाओं में यह 12.22 गुना ज्यादा है।
सर्वे टीम के एक अन्य सदस्य चन्द्रशेखर साहू ने बताया कि यूनियन कार्बाइड हादसे के गैस पीड़ित आबादी में खून के कैंसर की दर अपीड़ित आबादी की तुलना में 21.6 गुना ज्यादा है। इसी तरह, फेफडे़ और गले के कैंसर की दर अपीड़ित आबादी की तुलना में क्रमशः 28.78 और 33.86 गुना ज्यादा है।