अभिषेक के लिए सिर्फ पत्नी नहीं, 'ऐश्वर्य' की चाबी भी, शादी के बाद जूनियर बच्चन बने सिल्वर स्क्रीन के 'जादूगर'

अभिषेक के लिए सिर्फ पत्नी नहीं, 'ऐश्वर्य' की चाबी भी, शादी के बाद जूनियर बच्चन बने सिल्वर स्क्रीन के 'जादूगर'


मुंबई, 4 फरवरी। बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन की जिंदगी में ऐश्वर्या राय का आना किस्मत की चाबी की तरह थी, जिसने उनके जीवन और करियर के कई बंद दरवाजे धीरे-धीरे खोल दिए। पत्नी के रूप में वह धैर्य और समझदारी के साथ अभिनेता की जीवन में 'ऐश्वर्य' लेकर आईं। नतीजा ये रहा कि आज जूनियर बच्चन को सिर्फ एक स्टार किड नहीं, बल्कि सिल्वर स्क्रीन का 'जादूगर' भी कहा जाने लगा है।

5 फरवरी 1976 को मुंबई में जन्मे अभिषेक बच्चन की लव स्टोरी काफी दिलचस्प है। अभिषेक और ऐश्वर्या, दोनों पहली बार साल 2000 में फिल्म 'ढाई अक्षर प्रेम के' में साथ नजर आए। इसके बाद 'कुछ ना कहो' में उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। कैमरे के सामने दिखने वाली यह केमिस्ट्री धीरे-धीरे असल जिंदगी में भी बनने लगी। साथ काम करते हुए दोनों ने एक-दूसरे को करीब से समझा और यह रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़ता चला गया। साल 2006 में रिलीज हुई 'उमराव जान' और सुपरहिट फिल्म 'धूम 2' जैसी फिल्मों में उनकी जोड़ी को काफी पसंद किया गया।

फिल्म 'गुरु' के रिलीज होने के बाद साल 2007 में दोनों ने शादी कर ली। दोनों ने एक-दूसरे के करियर को समझा और सपोर्ट किया, जिसका असर खास तौर पर अभिषेक के काम में साफ दिखा।

शादी के बाद अभिषेक बच्चन के करियर में साफ बदलाव दिखाई दिया। इस दौर में उन्होंने सिर्फ 'स्टार हीरो' बनने की दौड़ से खुद को अलग किया और ऐसे किरदार चुने, जिनमें अभिनय की गहराई और चुनौती हो। भले ही हर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट न रही हो, लेकिन एक अभिनेता के तौर पर अभिषेक को लोगों ने काफी सराहा। 'झूम बराबर झूम' और 'सरकार राज' जैसी फिल्मों में उन्होंने साबित कर दिखाया कि वे रोमांस से लेकर गंभीर राजनीतिक ड्रामे वाले किरदारों में खुद को ढाल सकते हैं।

'दोस्ताना' (2008) में अभिषेक ने अपनी इमेज पूरी तरह बदल दी। कॉमिक टाइमिंग और दोस्ती के इमोशन्स को उन्होंने इतनी आसानी से निभाया कि दर्शकों को यह उनका रोल बेहद पसंद आया। 'पा' (2009) उनके करियर की सबसे अहम फिल्मों में गिनी जाती है। यहां उन्होंने एक गंभीर किरदार निभाया। खास बात यह रही कि फिल्म में महानायक और उनके पिता अमिताभ बच्चन भी थे, लेकिन उनके सामने होते हुए भी अभिषेक का अभिनय कमजोर नहीं पड़ा, बल्कि दर्शकों के बीच गहरी छाप छोड़ी। 'दिल्ली-6' (2009) में उनके अभिनय को सराहा गया।

'रावण' (2010) और 'दम मारो दम' (2011) में अभिषेक ने डार्क और ग्रे शेड वाले किरदारों को चुना। 'दम मारो दम' में उनका सख्त पुलिस अफसर वाला रोल दर्शकों को काफी पसंद आया। 'बोल बच्चन' (2012) के जरिए अभिषेक ने दिखाया कि कॉमेडी उनके लिए मुश्किल नहीं है। डबल रोल में उनकी बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग डिलीवरी और एक्सप्रेशंस ने फिल्म को हिट बनाया।

'धूम 3' (2013) और 'हैप्पी न्यू ईयर' (2014) जैसी बड़ी फिल्मों में भी उनके काम की दर्शकों ने जमकर तारीफें की। 2018 में 'मनमर्जियां' से अभिषेक ने एक बार फिर अपने अभिनय की ताकत दिखाई। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 'लूडो', 'द बिग बुल', 'बॉब बिस्वास' और 'दसवीं' ने उनके करियर को नई दिशा दी।

फिल्मों के अलावा, अभिषेक बच्चन ने बिजनेस की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाई। प्रो कबड्डी लीग में 'जयपुर पिंक पैंथर्स' टीम के मालिक के तौर पर उन्होंने खेल और बिजनेस दोनों में समझदारी दिखाई। रियल एस्टेट और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में भी उन्होंने सोच-समझकर कदम रखे और स्थिर सफलता हासिल की।

एक तरफ जहां 1989 में प्रकाश मेहरा की फिल्म 'जादूगर' में अमिताभ बच्चन ने पर्दे पर जादू दिखाया था, तो असल जिंदगी में अभिषेक बच्चन ने यह जादू रचा।
 
Similar content Most view View more

Latest Replies

Forum statistics

Threads
16,711
Messages
16,748
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top