सबरीमाला गोल्ड केस: केरल विधानसभा में फिर रण, विपक्ष ने सरकार को घेरा, कहा- प्रभावशाली लोगों को बचा रही

15th Kerala Legislative Assembly


तिरुवनंतपुरम, 4 फरवरी। केरल विधानसभा में बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी हंगामा हुआ। वजह रही सबरीमाला सोने की कथित चोरी मामले की जांच को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस।

कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने आरोप लगाया कि पिनाराई विजयन सरकार आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस मामले की जांच जल्दबाजी में खत्म करना चाहती है। विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने सदन में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच को जानबूझकर “स्टेज-मैनेज” किया जा रहा है।

सतीशन ने मुख्यमंत्री की उस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने विधानसभा में हुई झड़पों को “मजाक” बताया था।

इसके अलावा, सतीशन ने मांग की कि कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों को विधानसभा की कार्यवाही से हटाया जाए। सरकार की ओर से मंत्री एम.बी. राजेश, पी. राजीव और वी. शिवनकुट्टी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने सरकार के रुख का बचाव करते हुए कांग्रेस पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।

एम.बी. राजेश ने रिकॉर्ड से टिप्पणियां हटाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष की ओर से कोई अपमानजनक भाषा इस्तेमाल नहीं की गई है। वहीं, मंत्री पी. राजीव ने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि इस मामले का मुख्य आरोपी कथित तौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में कैसे आया। इस बयान के बाद सदन में बहस और तेज हो गई।

सत्ता पक्ष ने कुछ तस्वीरों का भी जिक्र किया, जिनमें कथित मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी राष्ट्रीय नेताओं के साथ दिखाई दे रहा है। इसके जवाब में विपक्ष ने कहा कि ऐसी ही तस्वीरें वामपंथी नेताओं के साथ भी मौजूद हैं और किसी एक पक्ष को निशाना बनाना दोहरे मापदंड को दिखाता है।

निजी आरोपों और तीखी बहस के कारण विधानसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्ष ने जांच में गंभीर खामियों का आरोप लगाते हुए अपना विरोध जारी रखा और अंत में सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद दिन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, केरल हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) तय 90 दिनों की अवधि में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई। इसके चलते तीन आरोपियों को कानूनी जमानत मिल गई।

विपक्ष का कहना है कि इस देरी से उसका यह आरोप और मजबूत होता है कि जांच को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। वहीं, सरकार ने साफ किया है कि जांच कानून के दायरे और अदालत की निगरानी में आगे बढ़ रही है।
 

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