प्रियंका चतुर्वेदी का बड़ा आरोप: सरकार मणिपुर को लोकतंत्र कुचलने का 'मॉडल केस' और संविधान का अपमान बना रही

मणिपुर को लोकतंत्र कुचलने का 'मॉडल केस' बना रही है सरकार : प्रियंका चतुर्वेदी


नई दिल्ली, 4 फरवरी। शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने मणिपुर में नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका और भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मणिपुर को 'प्रजातंत्र को कमजोर करने का मॉडल केस' बना दिया गया है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने आईएएनएस से कहा कि मणिपुर में जिस तरह लोकतंत्र, संविधान और जनता की आवाज को दबाया गया है, वह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगता है, तो आमतौर पर वहां नए सिरे से चुनाव कराए जाते हैं। लेकिन, मणिपुर में ऐसा नहीं हुआ। यहां आपसी बातचीत से यह तय कर लिया गया कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा, जबकि जनता को हिंसा और अव्यवस्था के बाद भी यह अधिकार नहीं मिला कि वे वोट देकर तय करें कि उन्हें कौन सी सरकार चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहले मुख्यमंत्री को पद पर बनाए रखा गया, फिर अचानक रात के समय राष्ट्रपति शासन लगाया गया। इसके बाद संसद से अनुमति लेकर राष्ट्रपति शासन हटाया गया और बिना चुनाव के नया मुख्यमंत्री तय कर दिया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक उदाहरण बताया।

संसद की कार्यवाही को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि परंपरा यह रही है कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाता है और सत्ता पक्ष उसका जवाब देता है। लेकिन, मौजूदा सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम जनता के सामने सच्चाई लाना, जवाबदेही तय करना और शासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना होता है, लेकिन आज ये सब चीजें गायब हैं।

राहुल गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में एक ऐसी किताब पढ़ रहे थे, जिसे सरकार छपने तक नहीं दे रही है। उन्होंने बताया कि यह किताब एक पूर्व आर्मी चीफ के अनुभवों पर आधारित है, जिसमें गलवान घाटी में हुई झड़पों का जिक्र है। सरकार उस सच्चाई को जनता के सामने आने से रोक रही है। जब एक मैगजीन ने उस किताब के अधिकृत अंश प्रकाशित किए, तो उसे भी पढ़ने से रोका गया।

ममता बनर्जी द्वारा एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर बोलते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को एसआईआर करने का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर भारतीय जनता पार्टी का एजेंडा चलाया जा रहा है और मतदाताओं के अधिकारों का हनन हो रहा है।

उन्होंने दावा किया कि पहले बिहार में एसआईआर लागू कर वोटरों के अधिकार छीने गए और अब यही प्रक्रिया बंगाल और तमिलनाडु में देखने को मिल रही है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष और राजनीतिक दलों के पास जो संवैधानिक और कानूनी अधिकार हैं, उनका इस्तेमाल कर ममता बनर्जी चुनाव आयोग में जवाबदेही लाने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को 'डील नहीं बल्कि फरमान' करार दिया। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार भारत-पाकिस्तान के तनाव कम होने की जानकारी भारत सरकार की बजाय अमेरिका के राष्ट्रपति के सोशल मीडिया से मिली। इसी तरह ट्रेड डील की खबर भी रातों-रात सामने आई। इस समझौते के तहत भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जबकि अमेरिका से आने वाले आयात पर शून्य शुल्क होगा। टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाएं शून्य पर लाई जा रही हैं, यह बात खुद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कही है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी आरोप लगाया कि इस समझौते के तहत भारत को रूस, ईरान और वेनेजुएला से तेल न खरीदने की बात कही गई है। पिछले एक साल में भारत के 10 प्रतिशत से ज्यादा तेल आयात अमेरिका से हुए हैं और कुछ महीनों पहले भारतीय कंपनियों ने अमेरिका के साथ एलएनजी सप्लाई का समझौता भी किया है।

उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर एनर्जी और अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने जैसे बिल रातों-रात लाए गए और बिना ज्यादा चर्चा के पास कर दिए गए, जो अमेरिका के हित में हैं। उन्होंने किसानों की चिंता का भी जिक्र किया और कहा कि अगर कृषि बाजार खोल दिया गया और शून्य शुल्क पर विदेशी खाद्य पदार्थ आने लगे, तो भारतीय किसानों को भारी नुकसान होगा। जब भारत-यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड एग्रीमेंट हुआ था, तो उन्होंने उसका स्वागत किया था, क्योंकि वह बराबरी की शर्तों पर था। लेकिन भारत-अमेरिका समझौता उनके मुताबिक असमान, अनुचित और असंतुलित है, जो देश के हित में नहीं है।
 

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