झारखंड धान खरीद घोटाला: मरांडी का हेमंत सरकार पर आरोप, किसानों को लूटकर बिचौलियों की चांदी

झारखंड में सरकारी स्तर पर धान खरीद में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार: बाबूलाल मरांडी


रांची, 3 फरवरी। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में सरकारी स्तर पर धान खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीद के नाम पर किसानों को लूटा जा रहा है और केंद्र सरकार से भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बिचौलियों के खातों में जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार शाम प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन देश-विदेश के दौरों में यह दावा करते हैं कि उनकी सरकार गांव से चलती है, लेकिन हकीकत यह है कि गांव की रीढ़ कहे जाने वाले किसान आज परेशान, लाचार और विवश हैं।

उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान 3200 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी पर धान खरीद का वादा किया गया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 2400 रुपए कर दिया गया। इस राशि में से 2300 रुपए केंद्र सरकार की ओर से अनुदान के रूप में आते हैं, जबकि राज्य सरकार की हिस्सेदारी मात्र 100 रुपए है।

मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस 2400 रुपए की दर में भी 'लूट का रास्ता' बना दिया है। इस वर्ष राज्य सरकार ने 60 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य तय किया था, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक केवल 19 लाख 80 हजार 216 क्विंटल धान की ही खरीद हो सकी है। राज्य में कुल 2 लाख 79 हजार पंजीकृत किसान हैं, जिनमें से मात्र 35,547 किसानों से ही धान खरीदा गया है। यह आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि सरकार की किसानों से वास्तविक खरीद की कोई मंशा नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गोदाम भरे होने का बहाना बनाकर धान खरीद को टाला जा रहा है और मार्च तक खरीद जारी रहने की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि झारखंड के सीमांत किसान आखिर कब तक अपना धान रोककर रख पाएंगे। किसानों को तत्काल नकदी की जरूरत होती है और इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें बिचौलियों के हाथों धान बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर पदाधिकारी भी यही भाषा बोल रहे हैं और पूरी व्यवस्था एक सिंडिकेट की तरह काम कर रही है। मरांडी के अनुसार किसान 1500 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर दलालों को धान बेचने को मजबूर हैं, जबकि सरकार बाद में उन्हीं बिचौलियों से धान खरीदकर लक्ष्य पूरा करने का दिखावा करेगी। इससे तय दर का लाभ किसानों को नहीं, बल्कि दलालों को मिलेगा और अंततः मुख्यमंत्री की “तिजोरी” भी भरेगी।

मरांडी ने कहा कि राज्य में इस तरह का बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है और सरकार किसानों को इनके जरिए लुटवाने में लगी हुई है। उन्होंने बताया कि गुमला जिले में सामने आए एक मामले को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और सदन में भी इस मुद्दे को उठाया था, जिसमें फर्जी किसानों को दिखाकर धान खरीद किए जाने का आरोप था। लेकिन सरकार ने कार्रवाई करने के बजाय इस पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है।
 

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