नई दिल्ली, 3 फरवरी। दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को महंगाई से राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण और जन-केंद्रित फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में कैबिनेट ने एक योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत साल 2026 से दिल्ली में सभी राशन कार्ड धारक परिवारों को हर साल दो एलपीजी सिलेंडरों की कीमत के बराबर वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह सहायता होली और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के मौकों पर दी जाएगी।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि यह योजना दिल्ली सरकार की लक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह कल्याण नीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सिलेंडरों के लिए तय राशि परिवार के मुखिया के आधार से जुड़े बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से दी जाएगी।
दिल्ली में सभी राशन कार्ड धारक परिवार इस योजना के तहत आएंगे। यह योजना सभी राशन कार्ड धारकों पर समान रूप से लागू होगी, भले ही वे खाना पकाने के लिए एलपीजी या पीएनजी का इस्तेमाल करते हों। वित्तीय सहायता हर साल दो मौकों पर होली और दीपावली पर दी जाएगी, भले ही उस महीने सिलेंडर रिफिल किया गया हो या नहीं।
फिलहाल, दिल्ली में एक एनपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपए प्रति सिलेंडर है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत आने वाले लाभार्थियों को भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली 300 रुपए प्रति सिलेंडर सब्सिडी को एडजस्ट करने के बाद 553 रुपए प्रति सिलेंडर की वित्तीय सहायता मिलेगी, जबकि गैर-उज्ज्वला राशन कार्ड धारक परिवारों को 853 रुपए प्रति सिलेंडर की सहायता दी जाएगी।
इस योजना पर अनुमानित सालाना खर्च लगभग 242.77 करोड़ रुपए होगा, जिसे एलपीजी कीमतों, भारत सरकार की सब्सिडी और लाभार्थियों की संख्या में बदलाव के अनुसार एडजस्ट किया जाएगा। दिल्ली सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए स्पष्ट बजटीय प्रतिबद्धता सुनिश्चित की है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह योजना सिर्फ वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि त्योहारों के मौसम में परिवारों को सम्मान और राहत देने का एक जरिया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए केंद्र सरकार ने देश भर की करोड़ों महिलाओं को स्वच्छ ईंधन, बेहतर स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन दिया है।
दिल्ली सरकार की यह पहल इसी दूरदर्शी सोच का विस्तार है, जहां कल्याण को सब्सिडी की राजनीति के तौर पर नहीं, बल्कि नियम आधारित और पारदर्शी शासन के तौर पर लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि यह योजना भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र का हिस्सा थी, और दिल्ली सरकार अपने सभी वादों को धीरे-धीरे हकीकत में बदल रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक घोषणा नहीं है, बल्कि शासन की मंशा और प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता का सबूत है। यही सुशासन का असली फर्क है।