नई दिल्ली, 3 फरवरी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा केंद्र सरकार पर अमेरिका के साथ ट्रेड डील करने के दबाव और समझौते के आरोप लगाए जाने पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की भारत विरोधी सोच साफ झलकती है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के कई चेहरों पर उस समय खुशी दिखाई दी थी, जब अमेरिका ने भारत पर टैरिफ बढ़ाया था, लेकिन जब भारत-अमेरिका ट्रेड डील ऐतिहासिक रूप लेने जा रही है, तब विपक्ष को खुश होना चाहिए था।
उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि इससे पहले यूरोपीय यूनियन के साथ ‘मदर ऑफ ऑल डील’ हो चुकी है, वहीं यूनाइटेड किंगडम के साथ भी अहम समझौते हुए हैं, लेकिन इन सभी पर विपक्ष ने खुशी जाहिर करने के बजाय लगातार सवाल खड़े किए। ऐसे में यह सवाल उठता है कि विपक्ष और कांग्रेस पार्टी भारत के हित में खड़ी है या उसके विरोध में।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारतीय सेना, ट्रेड डील और देश के नेतृत्व के खिलाफ खड़ी नजर आती है, जिससे राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की भारत विरोधी सोच साफ झलकती है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष संसद को सुचारू रूप से चलने नहीं देना चाहता।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष 2014 से अब तक केंद्र सरकार ने हर विषय पर खुले मन से चर्चा की है। इस बार भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अच्छी और सार्थक चर्चा चल रही थी, लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकतंत्र और सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया। राहुल गांधी ने स्पीकर की रूलिंग के बावजूद बार-बार उसकी अवहेलना की और नियमों का पालन करने के बजाय लगातार चेतावनी के बाद भी विषय से भटकते रहे। जिन मुद्दों पर सदन में चर्चा की अनुमति नहीं थी, यहां तक कि जिन पुस्तकों का प्रकाशन तक नहीं हुआ था, उनके बारे में भी राहुल गांधी बोलते रहे।
अनुराग ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी की मंशा केवल भारतीय सैनिकों का अपमान करने की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पास अब संसद, संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना ही एकमात्र एजेंडा बचा है। जब कांग्रेस को यह समझ आ गया कि देश को एक शानदार बजट मिला है और राष्ट्रपति के अभिभाषण में भारत की प्रगति और आगे बढ़ते कदमों को स्पष्ट रूप से दिखाया गया है, तब विपक्ष के पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा। इसी हताशा में कागज फाड़कर चेयर की ओर फेंके गए, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
भाजपा सांसद ने आगे कहा कि जिस व्यक्ति को यह तक नहीं पता कि सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति लेनी होती है, वह लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान कैसे करेगा। उन्होंने इसे अहंकार करार देते हुए कहा कि यह एक परिवार का अहंकार है, जो लंबे समय तक सत्ता में रहा और अब सत्ता के नशे से बाहर नहीं आ पा रहा है। राहुल गांधी का यह कहना कि उन्हें अनुमति लेने की जरूरत नहीं है, यह दर्शाता है कि वह खुद को सदन से बड़ा समझने लगे हैं। यही सोच कांग्रेस पार्टी को लगातार चुनावी हार की ओर ले जा रही है और यही सोच उनकी भारत विरोधी टिप्पणियों में भी साफ दिखाई देती है।