इमरान खान की बहन अलीमा खान पर शिकंजा! पाकिस्तानी कोर्ट ने फिर जारी किए गैर-जमानती वारंट, SP को फटकार

पाकिस्तानी कोर्ट ने इमरान खान की बहन के खिलाफ फिर से जारी किया गैर-जमानती वारंट


इस्लामाबाद, 3 फरवरी। रावलपिंडी की एक एंटी-टेररिज्म कोर्ट (एटीसी) ने मंगलवार को एक बार फिर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान और उनके दो जमानतदारों के खिलाफ नवंबर 2024 के विरोध प्रदर्शन के मामले में गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए। यह जानकारी स्थानीय मीडिया ने दी।

कोर्ट ने अलीमा खान के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी न करने पर एसपी रावल को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने दो जमानतदार- नदीम बिलाल और वाहिद महमूद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए, और एसपी रावल को उन्हें गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया।

अदालत ने एसपी रावल को बुधवार को मौजूद रहने और स्पष्ट आदेशों के बावजूद अलीमा खान को गिरफ्तार करके पेश न करने का कारण बताने का आदेश दिया। इसके अलावा, कोर्ट ने अलीमा खान को गिरफ्तार करने और 4 फरवरी को बिना किसी लापरवाही के उसे कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया, क्योंकि कोर्ट में पेशी से छूट के लिए उनका आवेदन खारिज कर दिया गया था।

यह मामला सादिकबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है और यह 24 नवंबर 2024 को इस्लामाबाद के डी-चौक पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान ने 13 नवंबर 2024 को 24 नवंबर को विरोध प्रदर्शन के लिए 'अंतिम आह्वान' किया था, जिसमें पार्टी के चुनावी जनादेश की बहाली, हिरासत में लिए गए पीटीआई सदस्यों की रिहाई और 26वें संशोधन को रद्द करने की मांग की गई थी।

इमरान खान के आह्वान के बाद विभिन्न जिलों से पीटीआई समर्थकों ने इस्लामाबाद के डी-चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शनों के जवाब में राज्य ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक ऑपरेशन शुरू किया, जिसके कारण पीटीआई नेतृत्व को मौके से भागना पड़ा और 26 नवंबर को विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया।

इमरान खान, जो अगस्त 2023 से जेल में हैं, 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सत्ता से हटाए जाने के बाद से भ्रष्टाचार और आतंकवाद सहित कई मामलों का सामना कर रहे हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने सोमवार को कराची और सिंध के अन्य हिस्सों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने (एमपीओ) अध्यादेश के तहत की गई छापेमारी के दौरान 180 से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं की कथित हिरासत के खिलाफ सिंध उच्च न्यायालय (एसएचसी) का रुख किया।

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पीटीआई ने रविवार को सिंध पुलिस पर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के घरों पर छापेमारी करने और उनमें से लगभग 180 लोगों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया। सिंध सरकार ने पीटीआई द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं - पीटीआई सिंध के जनरल सेक्रेटरी मंसूर अली और इंसाफ लॉयर्स फोरम के प्रेसिडेंट फैसल मुगल - ने अनुरोध किया है कि 1 फरवरी को एमपीओ के तहत जारी आदेश को गलत ठहराया जाए और पार्टी कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करने की मांग की है।

याचिका में पार्टी ने 14 प्रतिवादियों का जिक्र किया है, जिनमें प्रांतीय मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, सिंध, केंद्रीय पुलिस कार्यालय, अतिरिक्त आईजीपी कराची पुलिस, डिप्टी आईजी पूर्व, पश्चिम, दक्षिण क्षेत्र, एसएसपी कराची पूर्व, पश्चिम, दक्षिण, मध्य, मलिर जिला, कोरंगी जिला और केमारी जिला शामिल हैं।
 

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