नई दिल्ली, 3 फरवरी। केरल के राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर ने सोमवार को उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए अपने जीवन पर हुए राजनीतिक हमले का उल्लेख किया। इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदानंदन मास्टर के भाषण को सुनने की सलाह दी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राज्यसभा में सदानंदन मास्टर द्वारा दिए गए भाषण का वीडियो शेयर किया। साथ ही उन्होंने कहा कि सदानंदन मास्टर ने राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान केरल में संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं पर दशकों से हो रही हिंसा का जो दृश्य दिखाया, उसे देखकर हर इंसान का दिल पसीज जाएगा। जिस अमानवीय पीड़ा और अत्याचार को सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, उसे भाजपा और संघ के कार्यकर्ता केरल में दशकों से झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विचारधारा अलग होने या विचारों की सहमति न होने पर किसी के पैर काट देना, किसी की जान ले लेना, ऐसी क्रूर विचारधारा के खिलाफ भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं ने जो संघर्ष किया है, उसे शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता।
अमित शाह ने आगे कहा कि लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति को यह संघर्ष और त्याग अवश्य देखना चाहिए। साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहिष्णुता की झूठी दुहाई देने वालों को भी सदानंद मास्टर का यह भाषण सुनना चाहिए। शायद वे सदानंद और उनके जैसे असंख्य लोगों के संघर्ष को समझ पाएं।
बता दें कि एक दिन पहले सदानंदन मास्टर ने सदन में कहा कि वे कभी एक पूरी तरह सक्षम व्यक्ति थे, लेकिन आज उन्हें कृत्रिम पैरों (आर्टिफिशियल लिंब्स) के सहारे जीवन जीना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि यह स्थिति किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण नहीं, बल्कि 31 वर्ष पहले हुए एक राजनीतिक हमले का परिणाम है।
सदानंदन मास्टर स्कूल के शिक्षक से राजनीतिज्ञ बने हैं और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य हैं। वह भारतीय जनता पार्टी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं और भाजपा की केरल इकाई में कार्यरत रहे हैं। उन्होंने सदन में बताया कि 31 वर्ष पहले उस समय सीपीएम नेताओं की सलाह पर सीपीआईएम कार्यकर्ताओं ने उन पर जानलेवा हमला किया।
उन्होंने सदन को बताया कि यह घटना तब हुई जब वे अपने अंकल के घर से लौट रहे थे, जहां उनकी बहन की शादी को लेकर बातचीत हुई थी। बस से उतरते ही एक बाजार में पहले से घात लगाए बैठे संगठित अपराधियों ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया, सड़क पर गिराया और बेरहमी से उनके दोनों पैरों पर घातक हमला किया। उन्होंने कहा कि हमलावर राजनीतिक नारे लगा रहे थे और इस हिंसा को राजनीतिक जवाब के रूप में अंजाम दिया गया। उन्होंने सदन में यह सवाल उठाया कि जो लोग आज लोकतंत्र, सहिष्णुता और मानवता की बातें करते हैं, उनका अतीत हिंसा से जुड़ा रहा है।