जम्मू, 3 फरवरी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को उस वक्त जबरदस्त हंगामा हुआ, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई विधायकों ने कई अहम मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन किया।
भाजपा के दो विधायकों ने सदन से यह कहते हुए वॉकआउट किया कि उन्हें उमर अब्दुल्ला सरकार से संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जबकि सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के विधायकों ने केंद्र शासित प्रदेश के बाहर कश्मीरियों पर हमलों और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर असेंबली परिसर में धरना दिया।
भाजपा विधायक राजीव जसरोटिया और पवन गुप्ता ने विधानसभा से वॉकआउट किया और कार्यवाही के दौरान उठाए गए मुद्दों पर सरकार के जवाबों से असंतोष जताया। जसरोटिया ने सरकार की तरफ से मिले 'असंतोषजनक और टालमटोल वाले जवाबों' के बाद वॉकआउट किया। इसके बाद, उधमपुर से भाजपा विधायक पवन गुप्ता भी विरोध में शामिल हो गए और अपने पार्टी विधायक के साथ एकजुटता दिखाते हुए सदन से बाहर चले गए।
यह वॉकआउट असेंबली के अंदर और बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच हुआ है, जिसमें विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले ज़रूरी मुद्दों पर सरकार से ठोस कार्रवाई और स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। इन सब के बीच, सत्ताधारी एनसी के विधायकों ने केंद्र शासित प्रदेश के बाहर कश्मीरियों पर हमलों और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सदन के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया।
एक अन्य घटनाक्रम में जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और विधायक सज्जाद गनी लोन ने उपराज्यपाल के भाषण में तीन अहम संशोधन पेश किए, जिसमें कश्मीरियों की सुरक्षा, दिहाड़ी मजदूरों को रेगुलर करने और सिविल सेवा उम्मीदवारों के लिए उम्र में छूट पर चिंता जताई गई।
असेंबली सेक्रेटेरिएट की मानें तो सज्जाद लोन ने एक संशोधन का प्रस्ताव रखा, जिसमें अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कश्मीरी छात्रों, व्यापारियों और फेरीवालों पर हुए हमलों की निंदा न किए जाने पर दुख जताया गया। उन्होंने एलजी के भाषण में संशोधन पेश किया है। उन्होंने डेली वेजर्स को रेगुलर करने की भी मांग की, जो जम्मू और कश्मीर में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांग है।