नई दिल्ली, 3 फरवरी। भारत-अमेरिका के व्यापार समझौते को भाजपा नेताओं ने ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि भारतीय सामानों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने से दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भाजपा नेता तरुण चुघ ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "भारत-अमेरिका के ऐतिहासिक व्यापार समझौते से भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी। 18 प्रतिशत टैरिफ के साथ युवाओं, किसानों और एमएसएमई के लिए नए अवसर खुलेंगे। मजबूत भारत अमेरिकी साझेदारी से निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन को गति मिलेगी। ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक अहम उपलब्धि है।"
भाजपा सांसद सस्मित पात्रा ने कहा, "यह एक बहुत ही सकारात्मक कदम है, क्योंकि यह ईयू-भारत एफटीए और उससे पहले यूके डील के बाद आया है, और जिस तरह की ग्लोबल चुनौतियों का हम सामना कर रहे हैं, यह ट्रेड डील उन चुनौतियों को कम करने में मदद करेगी। यह सहयोग के नए रास्ते खोलेगा। कम टैरिफ से देश और उसके एक्सपोर्ट को अमेरिका में बाजार ढूंढने में भी मदद मिलेगी।"
उन्होंने कहा कि न सिर्फ व्यापार और वाणिज्य में, बल्कि विज्ञान और टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में भी संयुक्त सहयोग के क्षेत्र हो सकते हैं। चूंकि यह इस महीने दिल्ली में होने वाले एआई ग्लोबल इम्पैक्ट समिट से ठीक पहले आया है, इसलिए यह एक ऐसा मौका भी है जहां अमेरिकी टेक्नोलॉजी और भारतीय उत्पाद मिलकर काम कर सकते हैं। मैं इसे एक बहुत ही सकारात्मक कदम के तौर पर देखता हूं।"
भाजपा सांसद बलभद्र माझी ने कहा, "पीएम मोदी की लीडरशिप देश और उसके सभी लोगों पर फोकस है। वह देश की भलाई के लिए बोलते और काम करते हैं। ट्रंप एक बिजनेसमैन होने के नाते, स्वाभाविक रूप से अपने देश की इकॉनमी को प्राथमिकता देते हैं और अपने फायदे के लिए दबाव बनाने की कोशिश करते हैं, हालांकि पीएम मोदी कभी भी दबाव में नहीं झुकते हैं।"
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए बलभद्र माझी ने कहा, "अब तो बंगाल के लोग भी उन्हें ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ममता बनर्जी को कभी एक मजबूत नेता माना जाता था, एक निडर फाइटर के तौर पर पहचाना जाता था जो संघर्षों से आगे बढ़ीं। लेकिन पिछले कुछ सालों में, बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के बाद से, उनका फैसला कमजोर पड़ गया है। ऐसा लगता है कि वह यह तय नहीं कर पा रही हैं कि सत्ता और देश में से किसे प्राथमिकता देनी है।"