श्रीनगर, 2 फरवरी। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर जिले की पुलिस ने सोमवार को बताया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी को 14 साल की सजा दिलाने में सफलता मिली है।
पुलिस के एक बयान में कहा गया, “श्रीनगर पुलिस ने एक मामले में दोष सिद्ध कराया है, जिसमें एमआर गंज पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 363 और 376 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।”
पुलिस के अनुसार, यह मामला 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के अपहरण और यौन उत्पीड़न से जुड़ा है, जिसकी रिपोर्ट 11 अप्रैल 2021 को दर्ज कराई गई थी।
बयान में कहा गया कि श्रीनगर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए गहन जांच की, पीड़िता को बरामद किया, गवाहों के बयान दर्ज किए, सबूत जुटाए और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मेडिकल व फॉरेंसिक जांच कराई।
जांच पूरी होने के बाद श्रीनगर की फास्ट ट्रैक (पॉक्सो) अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई।
विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को बिना किसी संदेह के दोषी पाया।
पुलिस के मुताबिक, 30 दिसंबर 2025 को अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 14 साल की सजा और 15,000 रुपए का जुर्माना लगाया।
बयान में आगे कहा गया कि श्रीनगर पुलिस महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाती है और त्वरित व पेशेवर जांच के जरिए पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पॉक्सो अधिनियम, 2012 भारत का एक कानून है, जिसका उद्देश्य 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और अश्लीलता से बचाना है।
इस कानून के तहत तेज सुनवाई, सख्त सजा (2019 से मृत्युदंड का प्रावधान भी) और विशेष अदालतों की व्यवस्था की गई है।
पॉक्सो कानून बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की अलग-अलग श्रेणियां तय करता है और यह लड़के और लड़की दोनों पर समान रूप से लागू होता है।
इस कानून के तहत बच्चे का बयान उसके घर या उसकी पसंद की जगह पर, संभव हो तो महिला पुलिस अधिकारी द्वारा दर्ज किया जाता है। साथ ही, नाबालिग पीड़ित की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
14 नवंबर 2012 से लागू पॉक्सो अधिनियम का उद्देश्य हर स्तर पर बच्चे के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना है।