नई दिल्ली, 2 फरवरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना लगातार नौवां बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने आयुर्वेद को लेकर कई घोषणाएं की हैं और नए संस्थान बनाने की घोषणा की गई है।
इसी क्रम में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने केंद्रीय बजट की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि बजट में आयुष और समग्र स्वास्थ्य प्रणाली से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
प्रो. प्रजापति ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि बजट में तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के लिए आवंटन, उन्नत गुणवत्ता वाली प्रयोगशालाओं की व्यवस्था और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए हब बनाने की घोषणा बेहद सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि बीते कुछ वर्षों में विदेशों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भारत आ रहे हैं। आयुर्वेद के साथ-साथ आधुनिक चिकित्सा, यूनानी, होम्योपैथी, योग और नेचुरोपैथी जैसी पद्धतियों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। भारत की समग्र चिकित्सा प्रणाली अब वैश्विक पहचान बना रही है।
प्रो. प्रजापति ने कहा कि पहले जिन उपचार पद्धतियों को प्रमाण के अभाव में संदेह की दृष्टि से देखा जाता था, आज उनके पक्ष में कई एविडेंस-बेस्ड रिसर्च प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके चलते जनता में जागरूकता बढ़ी है और लोग वैकल्पिक व समग्र चिकित्सा की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में भले ही भौतिक संसाधनों की कोई कमी न हो, लेकिन मानसिक और आत्मिक संतुष्टि का अभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। आयुर्वेद शरीर, मन, आत्मा और इन्द्रियों को जोड़कर संपूर्ण स्वास्थ्य की जो अवधारणा प्रस्तुत करता है, वही आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।